अफगानिस्तान की संघर्षरत महिलाओं को मिला संयुक्त राष्ट्र का समर्थन, महासचिव ने जताई चिंता

 

समान अधिकारों के लिए संघर्षरत अफगानिस्तान की महिलाओं को संयुक्त राष्ट्र का साथ मिला है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने उनके साथ हो रहे अन्याय को लेकर चिंता जताई है। इससे अफगानिस्तान में चल रहे महिलाओं के आंदोलन को मानसिक संबल मिलने की उम्मीद है। अफगानिस्तान में महिलाएं नौकरियों एवं समाज में समान अधिकार को लेकर संघर्षरत हैं। वे लगातार काबुल की सड़कों पर प्रदर्शन भी कर रही हैं। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुतेरेस ने ट्वीट कर उनके हालातों पर चिंता जाहिर की।

ACROSS AFGHANISTAN, WOMEN AND GIRLS ARE MISSING FROM OFFICES AND CLASSROOMS.

NO COUNTRY CAN THRIVE WHILE DENYING THE RIGHTS OF HALF ITS POPULATION.

THE WOMEN AND GIRLS OF AFGHANISTAN MUST HAVE ACCESS TO ALL EDUCATION & EMPLOYMENT OPPORTUNITIES AND HEALTH CARE SERVICES.

— António Guterres (@antonioguterres) January 13, 2022

गुतेरेस ने अपने ट्वीट में लिखा कि अफगानिस्तान में कार्यालयों और विद्यालयों की कक्षाओं से महिलाएं एवं छात्राएं गायब हैं। कोई भी देश आधी आबादी की उपेक्षा करते हुए आगे नहीं बढ़ सकता है। अफगानिस्तान की महिलाओं को रोजगार के अधिकारों की वकालत करते हुए उन्होंने लिखा कि छात्राओं को शिक्षा के पूर्ण अवसर मिलने चाहिए। साथ ही उन्होंने महिलाओं एवं छात्राओं को स्वास्थ्य सेवाओं में भी समानता के अधिकार की बात कही। इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंता एवं आक्रोश व्यक्त कर चुके हैं। पूरी दुनिया इस मसले पर अफगानिस्तान पर शासन कर रहे तालिबान प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत करा चुकी है।

यूरोपीय देशों समेत 20 से अधिक देशों ने एक संयुक्त बयान में अफगानी महिलाओं के मानवाधिकारों के संरक्षण और उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की बात भी कही है। इन सबके बावजूद अफगानी महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर संघर्षरत हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें नौकरियों से हाथ धोने पड़े हैं और सामाजिक स्तर पर उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है।

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