संयुक्त राष्ट्र ने विविधता से निपटने में विफलता को बताया संघर्ष का मूल कारण

 

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति थाबो म्बेकी ने मंगलवार को एक के बाद एक ऐसे अफ्रीकी देशों का जिक्र किया, जहां विविधता से निपटने में विफलता संघर्ष का मूल कारण थी। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक के अंत में नाइजीरिया में बियाफ्रान युद्ध से लेकर इथियोपिया के टाइग्रे क्षेत्र में मौजूदा संघर्षों का मूल कारण यही है।

म्बेकी ने कांगो, बुरुंडी, आइवरी कोस्ट और सूडान में भी विविधता से निपटने में विफलता को ही संघर्षों का मूल कारण बताया। उन्होंने ‘सिएरा लियोन ट्रुथ एंड रिकन्सिलिएशन कमीशन’ की 2004 की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट ”यह सत्य बताती है कि विविधता से निपटने में विफलता के परिणामस्वरूप देश में 11 साल तक युद्ध चला, जो 1991 में शुरू हुआ था” और विविधता से निपटने में ऐसी ही विफलता के कारण ”कैमरून में हिंसक संघर्ष हुए, जो अब भी जारी है।”

संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के राजदूत निकोलस डी रिवेर ने इसी संदर्भ में कहा कि अटलांटिक महासागर और लाल सागर के बीच उत्तरी अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में, ”आतंकवादी संगठन, समुदायों के बीच घृणा फैलाने के लिए मतभेदों का ही इस्तेमाल करते हैं।”

उन्होंने कहा कि इराक, यमन और सीरिया सहित पश्चिम एशिया में भी जातीय और धार्मिक हिंसा मौजूद है। उन्होंने यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘विविधता, देश निर्माण और शांति की खोज’ विषय पर आयोजित एक बैठक में दिया, जिसे केन्या ने आयोजित किया था।

केन्या इस माह परिषद की अध्यक्षता कर रहा है और उसके मौजूदा अध्यक्ष उहुरु केन्याता हैं। केन्याता ने कहा, ”आज मैं जो मुख्य संदेश देना चाहता हूं, वह यह है कि विविधता से निपटने की दिशा में खराब प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है।”

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