ब्रिटेन सरकार ने लॉकडाउन लगाने में वक्त लिया, जिससे गईं हजारों जान

 

ब्रिटेन की संसद की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने कोविड-19 महामारी के आरंभिक दिनों में लॉकडाउन लगाने में काफी वक्त लिया, जिससे बीमारी के प्रसार को रोका नहीं जा सका और हजारों लोगों की जान गई। हाउस ऑफ कॉमन्स (निचले सदन) की विज्ञान और स्वास्थ्य समितियों की संयुक्त रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। देश में संक्रमण के मामले बढ़ने पर ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) की चेतावनी के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की सरकार ने आखिरकार लॉकडाउन का आदेश दिया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन अर्थव्यवस्था, सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं और समाज को होने वाले भारी नुकसान से बचने के लिए नहीं लगाया जा रहा था। लेकिन इस विलंब के घातक नतीजे सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार कठोर पृथकवास, संक्रमितों का पता लगाने के लिए जांच और मजबूत सीमा नियंत्रण जैसी अन्य रणनीतियों के अभाव में पूर्ण लॉकडाउन अपरिहार्य था और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए था।

इसमें कहा गया है कि समय रहते उचित कदम उठाने पर देश को शायद ऐसी गंभीर स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। 150 पन्नों की यह रिपोर्ट पूर्व स्वास्थ्य सचिव मैट हैंकॉक और पूर्व अधिकारी डोमिनिक कमिंग्स समेत 50 व्यक्तियों के बयानों पर आधारित है। बहरहाल इसमें महामारी से निपटने के एकमात्र उपाय के तौर पर टीके पर ध्यान देने तथा इसके विकास के लिए निवेश के फैसले को लेकर सरकार की सराहना भी की गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार के इस फैसले के कारण ही देश की 80 फीसदी आबादी का टीकाकरण हो गया है।

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