वैक्सीन विरोधी प्रदर्शनकारियों ने बुल्गारिया की संसद को घेरा, झड़प में कई घायल

 

कोविड वैक्सीन के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को विशाल रैली निकालकर बुल्गेरियाई संसद पर धावा बोलने की कोशिश की। सोफिया शहर के निचले हिस्से में कोरोनो वायरस प्रतिबंधों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई की। इसमें पुलिस अधिकारी सहित कई लोग घायल हुए हैं।

कोविड के लिए एक अनिवार्य हेल्थ पास को हटाने की मांग को लेकर संसद भवन के सामने लगभग तीन हजार लोगों जुटने से तनाव बढ़ गया। यह लोग अधिकारियों से भिड़ गए और आगे जाने का प्रयास करने लगे। यह लोग जबरन टीकाकरण का विरोध कर रहे थे। बसों में यहां पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने संसद के चारों ओर घेरा डाल दिया और पुलिस के घेरा पीछे धकेल कर संसद इमारत के सामने तक पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने सांसदों से बाहर आने और अपनी मांगों को पूरा करने का आह्वान किया। हल्की झड़प में पुलिस अधिकारियों सहित कई लोग घायल हो गए।

रैली में अल्ट्रा-नेशनलिस्ट रिवाइवल पार्टी के राष्ट्रीय झंडे और झंडे लहराते दिखे। उन्होंने “फ्रीडम” के नारे लगाए और वायरस के खिलाफ सभी उपायों की निंदा की। 39 वर्षीय इंजीनियर असपरुह मितोव ने रैली की शुरुआत में कहा कि मैं ग्रीन सर्टिफिकेट को मंजूरी नहीं देता। मुझे यह मंजूर नहीं है कि बच्चों को कक्षाओं में जाने से रोका जा रहा है। मुझे इन बातों का तर्क नहीं दिखता।

बुल्गारियाई लोगों को घर के अंदर और सार्वजनिक परिवहन के दौरान पर मास्क पहनना पड़ता है। रेस्तरां, कैफे और शॉपिंग मॉल और जिम में जाने के लिए टीकाकरण या नकारात्मक परीक्षण करने वाले लोगों को एक स्वास्थ्य संबंधी पास दिखाना पड़ता है। यूरोपीय संघ में सबसे कम टीकाकरण वाला देश बुल्गारिया में बुधवार को रिकॉर्ड उच्च दैनिक संक्रमण के मामले दर्ज किए गए। जो बड़े पैमाने पर ओमिक्रोन संक्रमण का प्रभाव माना जा रहा है।

पिछले महीने पदभार ग्रहण करने और बाल्कन देश में टीकाकरण का संकल्प लेने वाले प्रधानमंत्री किरिल पेटकोव ने बताया कि उन्हें खेद है कि वह प्रदर्शनकारियों से नहीं मिल सके लेकिन शुक्रवार को ऐसा करने के लिए तैयार थे। जब उनका क्वांरटीन अवधि समाप्त हो जाएगी। उन्होंने दोहराया कि स्वास्थ्य पास नहीं हटाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सोमवार को पेटकोव, राष्ट्रपति रुमेन रादेव और वरिष्ठ मंत्री को कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि के बाद यह लोग एकांतवास में चले गए हैं।

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