Shiv Sena Constitution Bench शिव सेना का मामला संविधान

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नई दिल्ली। शिव सेना के बागी विधायकों की अयोग्यता और डिप्टी स्पीकर के कुछ अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का निपटारा जल्दी नहीं होने वाला है। यह मामला संविधान पीठ को भेजा जाएगा। उससे पहले गुरुवार को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह इसे संविधान पीठ को भेजने पर विचार करेगी। साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग को भी अभी इस मामले में कोई फैसला करने से रोक दिया।

गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई सोमवार तक के लिए टाल दी। चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा- सोमवार को अदालत फैसला सुनाएगी की इस मामले को पांच जजों की बेंच को सौंपना चाहिए या नहीं? चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने चुनाव आयोग के वकील से कहा- दोनों पक्षों को चुनाव आयोग में हलफनामा देने की तारीख आठ अगस्त है। अगर कोई पक्ष समय की मांग करता है, तो आयोग उस पर विचार करे। अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि वह इस पर अभी फैसला न करे।

उद्धव ठाकरे गुट इस मामले को संविधान पीठ को भेजे जाने के खिलाफ है। उनके वकील सिब्बल ने चीफ जस्टिस से कहा- मामला संविधान पीठ को मत भेजें। हम दो घंटे में अपनी दलील खत्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा- जो विधायक अयोग्य ठहराए जा सकते हैं, वे चुनाव आयोग में असली पार्टी होने का दावा कैसे कर सकते हैं? इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- ऐसा करने से किसी को नहीं रोका जा सकता। दूसरी ओर चुनाव आयोग के वकील ने अदालत से कहा- अगर हमारे पास मूल पार्टी होने का कोई दावा आता है, तो हम उस पर निर्णय लेने के लिए कानूनन बाध्य हैं।

गुरुवार को सबसे पहले शिव सेना के 16 विधायकों की बरखास्तगी का मामला सुना गया। एकनाथ शिंदे गुट के वकील हरीश साल्वे ने अपना पक्ष रखते हुए स्पीकर के अधिकार और प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी और कहा- जब तक विधायक अपने पद पर है, तब तक वह सदन की गतिविधि में हिस्सा लेने का अधिकारी है। वह पार्टी के खिलाफ भी वोट करे तो वोट वैध होगा। इस पर चीफ जस्टिस ने सवाल किया- क्या एक बार चुने जाने के बाद विधायक पर पार्टी का नियंत्रण नहीं होता? वह सिर्फ पार्टी के विधायक दल के अनुशासन के प्रति जवाबदेह होता है?