Retail Inflation in April महंगाई आसमान पर!

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नई दिल्ली। खुदरा महंगाई दर में एक महीने में करीब एक फीसदी का बड़ा इजाफा हुआ है। महंगाई पर काबू करने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी के रिजर्व बैंक के फैसले के बाद आए पहले आंकड़ों में सरकार ने बताया है कि अप्रैल के महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़ कर 7.79 फीसदी हो गई है। मार्च के महीने में खुदरा महंगाई 6..95 फीसदी थी। इस तरह एक महीने में करीब एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से खुदरा महंगाई आसमान पर पहुंची है। थोक महंगाई की दर पहले से दहाई अंक में है।

गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीने की चीजों की महंगाई 8.38 फीसदी पहुंच गई है। चूंकि खुदरा मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के बास्केट का लगभग आधा हिस्सा खाने-पीने की चीजों का है इसलिए इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई दर पर दिख रहा है। आठ साल के बाद खुदरा महंगाई की दर इतनी ज्यादा हुई है। इससे पहले यूपीए सरकार के आखिरी महीने में यानी मई 2014 में खुदरा महंगाई दर 8.32 फीसदी थी। उसके बाद से लगातार इसमें कमी आ रही थी। लेकिन अप्रैल 2022 में यह 7.79 फीसदी पहुंच गई है।

यह लगातार चौथा महीना है, जब महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई की ओर से तय की गई अधिकतम सीमा से ऊपर है। आरबीआई ने महंगाई की दर चार फीसदी तय की है और इसमें दो फीसदी का मार्जिन रखा है। यानी महंगाई दर अधिकतम छह फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती है। लेकिन जनवरी से ही महंगाई दर इस सीमा से ऊपर है। जनवरी में खुदरा महंगाई दर 6.01 फीसदी थी, जो फरवरी में बढ़ कर 6.07 फीसदी हो गई। मार्च में यह 6.95 फीसदी दर्ज की गई थी और अप्रैल में बढ़ कर 7.79 फीसदी हो गई है।

अगर साल दर साल के हिसाब से देखें तो खुदरा महंगाई में साढ़े तीन फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। एक साल पहले अप्रैल 2021 में खुदरा महंगाई दर 4.23 फीसदी थी। माना जा रहा है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से महंगाई पर असर पड़ा है। इसे नियंत्रित करने के लिए पिछले दिनों रिजर्व बैंक ने आपात बैठक करके ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। बताया जा रहा है कि अगले महीने होने वाली दोमासिक मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ब्याज दर और बढ़ा सकता है।

बहरहाल, रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक समीक्षा कमेटी की बैठक में अप्रैल में महंगाई के अनुमान को बढ़ा दिया था। उसने पहली तिमाही में महंगाई दर 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। उसके मुताबिक दूसरी तिमाही में पांच फीसदी, तीसरी में 5.4 फीसदी और चौथी में 5.1 फीसदी महंगाई रहेगी। उसे अब इस अनुमान में संशोधन करना होगा क्योंकि पहली तिमाही के पहले दो महीने में ही औसत महंगाई दर सात फीसदी से ऊपर हो गई है।