कर्ण के पास सबसे बड़ा हथियार क्या था, लेकिन इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया ? जानिए

 

दानवीर कर्ण के पास अस्त्र का भण्डार था फिर भी मैं कर्ण के उन अस्त का वर्णन करूंगा जो भीष्म को छोड़कर शाय़द ही किसी के पास हो।।।।।।

भार्गव अस्त्र- कर्ण के पास भार्गव अस्त्र था इस अस्त्र के कारण अर्जुन को रण छोड़ कर भागना पड़ा और एक अक्षौहिणी सेना का नाश हुआ। वेदव्यास उवाच- कर्ण द्वारा चलाए भार्गव को कोई भी व्यक्ति विफल नहीं कर सकता क्योंकि कर्ण इस अस्त्र को बहुत ही प्रभावी तरीके से प्रयोग करता है।।।


बहाण्ड अस्त्र- इस अस्त्र का वर्णन रामायण काल में भगवान राम जी ने प्रयोग किया परन्तु यह अस्त्र कर्ण के पास था पर इस अस्त्र को कर्ण ने प्रयोग नहीं किया क्योंकि इस अस्त्र से पृथ्वी नष्ट हो जाती है और जीव जंतु भस्म हो जाते हैं इसे कलयुग का रासायनिक हथियार कह सकते हैं।।

पशुपतास्त्र अस्त्र- बोरी महाभारत में इस अस्त्र का कर्ण के पास होने का वर्णन है वेदव्यास जी ने भी कहा कि भीष्म पितामह जी और कर्ण ने इस अस्त्र का प्रयोग नहीं किया क्योंकि ये अस्त्र ना तो समाज के लिए सही है और न इसको चलाने वाले के लिए सही है क्योंकि ये अस्त्र का ग़लत इस्तेमाल करने पर यह चलाने वाले का ही नाश कर देता है।।

नागास्त्र- इस अस्त्र ने तो अर्जुन का सिर ही कलम कर देता अगर कृष्ण भगवान बीच में न आते।

अब बात करते हैं कर्ण के पास सबसे शक्तिशाली अस्त्र कौन था ।

अमृत से बने कवच कुंडल – कर्ण के पास यही एक ऐसा अस्त्र था जिसे न अर्जुन विफल कर पाते न ही भगवान कृष्ण जी का सुदर्शन चक्र । इसको इंद्र ने अर्जुन लाभ के लिए करण से दान में मांग लिया और महाभारत के युद्ध में पांडवों की जीत तय कर दी

अब बात करते हैं कर्ण को किस पर भरोसा था अपने अस्त्र पर या अपने धनुष और बाण पर । कर्ण को अपने अस्त्र से ज्यादा ख़ुद पर भरोसा था और अपनी रणकौशल पर इसका प्रमाण खुद कर्ण ने पूरी दुनिया को जीतकर सबको बताया।

कर्ण ने पूरी दुनिया को दुर्योधन के लिए जीत लिया था कर्ण ने इस दिग्विजय में अर्जुन की तरह न ही गांडीव धनुष उठाया न ही दिव्य धनुष बाण और भगवान शिव कवच को धारण किया। फिर भी कर्ण ने पूरे भारतवर्ष को सिर्फ लकड़ी के रथ पर सवार होकर और बिना दिव्यास्त्र के प्रयोग से पुरी पृथ्वी जीतकर दुर्योधन के चरणों में डाल दिया।

कर्ण उवाच – अर्जुन अगर दिव्यास्त्र की खोज में लगा है तो जाने दो योद्धा अपने बाहुबल से बड़ा होता है दिव्यास्त्र से नहीं । अब कर्ण पितामह भीष्म को कुछ शब्द कहता है – अधिक धन इकट्ठा करने,बाल पक जाने या अधिक आयु हो जाने और दिव्यास्त्र इकट्ठा करने से कोई योद्धा नहीं बन जाता ।

कर्ण अपने आप में खुद एक विशाल सेना और बहास्त्र था । कर्ण को ्् वेदव्यास ने खुद कर्ण को एक अतिमहारथी योद्धा की श्रेणी में रखा है ।

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