नंबर 13 को दुनिया भर में इसलिए माना जाता है अशुभ

 
कई ऐसी चीजें होती हैं हर किसी की जिंदगी में जिससे वह बचते रहते हैं। लेकिन उन्हीं चीजों से कई बार हम सबका सामना हो जाता है। इसी तरह से 13 नंबर है जिसे ज्यादातर लोग अशुभ मानते हैं। लोग पूरी कोशिश 13 नंबर से बचने की करते हैं। आखिर ऐसा क्या है 13 नंबर में जिसे लोग खतरनाक समझते हैं। चलिए फिर हम आपको इस नंबर के पीछे के बारे में रात 13 तारीख के दिन ही बताते हैं।
 


खबरों की मानें तो अशुभ इसलिए 13 नंबर को कहा जाता है क्योंकि एक बार ईसा मसीह के साथ विश्वासघात एक ऐसे ही शख्स ने किया था जो उनके साथ रात को खाना ग्रहण कर रहा था। 13 नंबर की कुर्सी पर यह शख्स बैठा था। उसके बाद से ही इस अंक को लोगों ने दुर्भाग्यपूर्ण के रूप में समझना शुरु कर दिया।
 


यही वजह है कि आज भी लोग इस नंबर को अशुभ मानते हैं और इससे दूर भागते हैं। हालांकि मनोविज्ञान ने ट्रिस्काइडेकाफोबिया या थर्टीन डिजिट फोबिया नाम 13 नंबर के इस डर को दे दिया है। दरअसल लोगों में 13 अंक का डर ऐसा है कि वह इस अंक का इस्‍तेमाल भी नहीं करते हैं।
 


13 नंबर का गहरा संबंध भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी में भी था। बता दें कि पहली बार जब अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के तौर पर सरकार बनाई थी तो 13 दिन तक ही चल पाई थी। उसके बाद जब दोबारा से अटल जी ने प्रधानमंत्री के पद के लिए शपथ ली तब भी उन्होंने 13 तारीख चुनी और वह सरकार उनकी महज 13 महीने तक ही  चल पाई।
 


13वीं लोकसभा के प्रधानमंत्री के रूप में जब वाजपेयी जी ने शपथ ली तो तब भी उन्होंने 13 दलों के सहयोग से 13 तारीख को ली और वह एक बार फिर से 13 से हार गए। बता दें कि इसे कुछ लोग संयोग नहीं मानते हैं। बहुत सारे पश्चिमी देशों में 13 नंबर को डर देखा जा सकता है। 13 नंबर को लेकर वहां के लोगों में अभी तक भी डर है।


भारत में भी कई ऐसे लोग आपको मिल जाएंगे जो 13 नंबर से डरते हैं। भारत के सुनियोजित शहर के रूप में चंडीगढ़ जाना जाता है। चंडीगढ़ शहर पंडित जवाहरलाल नेहरु जी के सपनों के शहर के लिए भी जाना जाता है। बता दें कि चंडीगढ़ में सेक्टर 13 नहीं बनाया हुआ है। जिस आर्किटेक्ट ने इस शहर का नक्शा बनाया था उनसे सेक्टर 13 नहीं बनाया। दरअसल वह भी 13 नंबर को अशुभ मानता था। विदेश से चंडीगढ़ शहर बनाने वाले आर्किटेक्ट को बुलाया था। 

From around the web

>