जानिए क्यों? महिलाओ का शनिदेव पर तेल चढ़ाना है वर्जित

 
हिंदू धर्म के पुराणों के अनुसार महिलाओ के द्वारा शनिदेव के ऊपर तेल चढ़ाने के पीछे एक कथा है। इसके अनुसार शनिदेव भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त हैं। एक बार शनिदेव की पत्नी पुत्र प्राप्ति की इच्छा में उनके पास गई, लेकिन शनिदेव श्रीकृष्ण के ध्यान में डूबे रहे, पत्नी को ओर देखा भी नहीं। क्रोधित होकर शनिदेव को उनकी पत्नी ने शाप दिया कि जिसे भी तुम देखोगे वह नष्ट हो जाएगा। जिसके कारम शनिदेव की नजर अशुभ मानी जाने लगी। इसी कारण शिन देव में पत्नी द्वारा दिए गए शाप के कारण महिलाएं उनको तेल नहीं चढा सकती है।

शिंगणापुर के शनिदेव अपने आप पर एक अनोखा मंदिर है। यह ऐसा एकलौता मंदिर है जिसकी प्रतिमा खुले आसमान में बनी हुई है। इस मंदिर में कोई भी छत नहीं है। यह प्रतिमा लगभग 5 फीट 9 इंच लंबी व 1 फीट 6 इंच चौड़ी है। इस मंदिर में जाने के अपने ही नियम है।

इस मंदिर में शनि देव को तेल चढानें के लिए पुरुषों को केसरिया रंग के ही वस्त्र धारण करने पडते है साथ ही इन्हीं कपड़ो में स्नान करने के बाद तेल चढाने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से केवल हमारा शरीर ही शुद्ध नहीं होता है बल्कि मन की भी शुद्धि हो जाती है जिससे हमारे मन में चल रही कोई भी अन्य बात समाप्त हो जाए। साथ ही इस रंग के कपड़े पहनने का तात्पर्य है कि आपके मन में धर्म-कर्म के भाव उत्पन्न हो जाए। इसलिए इस रंग के वस्त्र धारण किए जाते है।

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