जानिए......अस्थियो का पवित्र नदी में विसर्जन के पीछे के ये राज़

 
आखिर नदियों में ही क्यों किसी मरे हुए इंसान की अस्थियों का विसर्जन किया जाता हैं। हम बडी ही श्रद्धा के साथ यह काम करते हैं। इसके पीछे का कारण हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों और पुराणों में दिया गया हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता हैं।

इस बारे में पूर्ण जानकारी कुर्म पुराण में ही गई हैं। पुराणों के अनुसार मृतक की अस्थियों को फूल कहते हैं। इसमें अगाध श्रद्धा और आदर का भाव निहित होता है। साथ ही इसका वैज्ञानिक कारण भी माना जाता है। जानिए अस्थियों को पवित्र नदियों में विसर्जन करने के पीछे मुख्य का कारण।

कुर्म पुराण में इस श्लोक से बताया गया है कि ऐसा क्यों किया जाता हैं।

यावदस्थीनि गंगायां तिष्ठन्ति पुरुषस्य तु।
तावद् वर्ष सहस्त्राणि स्वर्गलोके महीयते।।
तीर्थानां परमं तीर्थ नदीनां परमा नदी।
मोक्षदा सर्वभूताना महापातकिनामपि।।
सर्वत्र सुलभा गंगा त्रिषु स्थानेषु दुर्लभा।
गंगाद्वारे प्रयागे च गंगासागरसंगमे।।
सर्वेषामेव भूतानां पापोपहतचेतसाम्।
गतिमन्वेषमाणानां नास्ति गंगासभा गति:।।

इस श्लोक के अनुसार कहा गया हैं कि जितने साल तक मृतक की अस्थियां गंगा जैसी पवित्र नही में रहती हैं, उतने हजारों साल तक उसकी पूजा स्वर्गलोक में की जाती हैं। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि मां गंगा सभी नदियों में से पवित्र हैं। इसके जल को छूने मात्र से सभी पाप धुल जाते है।

इसका जल ऐसा होता हैं कि चाहे जितना बड़ा पापी हो। उसकी अस्थियों को इसके जल में डालने से उसे मोक्ष की प्राप्ति होती हो। मोक्ष के लिए हरिद्वार, प्रयाग और गंगासागर इन तीनो स्थानों में दुर्लभ है। अगर आप उत्तम गति की इच्छा रखते हैं, तो गंगा नही के तरह कोई दूसरी गति नही हैं।

शास्त्रकारों के अनुसार - अस्थियों को पवित्र नदियों में ही विसर्जन के बारे में शास्त्रकार लोगों इस श्लोक के माध्यम से बताएगें। जो इस प्रकार हैं-

यावदस्वीनि गंगायां तिष्ठिन्ति पुरुषस्य च।
तावदूर्ष सहस्त्राणि ब्रहमालोके महीयते।

इसके अनुसार जब तक मृतक की अस्थियां गंगा में रहती हैं, तब तक मृतक की आत्मा शुभ लोकों में निवास करती हैं और कई आनंद का लाभ उठाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कहा जाता हैं कि जब तक मृतक की अस्थियों को गंगा में विसर्जित नही किया जाता हैं, तब तक उस मृतक की आत्मा परलोक की यात्रा नहीं कर सकती हैं।

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