शास्त्रो के अनुसार जानिए ब्रह्म मुहूर्त का विशेष महत्व!

 
हिंदू धर्म में पूजा पाठ को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। जब कभी भी हम लोग कोई भी शुभ कार्य करते है तो घर पर सभी लोग एक ही बात कहते होगे, कि ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ये काम करों। शुभ फल मिलेगा। तब हमारे दिमाग में एक ही बात आती है कि आखिर सभी काम ब्रह्म मुहूर्त में ही क्यों किए जाते है। और किसी समय क्यों नही। ब्रह्म मुहूर्त में जितना फल मिलता और किसी समय क्यों नही। शास्त्रो के अनुसार जानिए कि ब्रह्म मुहूर्त इतना महत्वपूर्ण क्यों है। और यह क्या होता है।

मुहूर्त बुध्येय धर्माथर चानु चिंतयेत। कायक्लेशांश्च तंमूलांवेदत वार्थमेव च।

शास्त्रों के अनुसार ब्रह्म का मतलब है कि ईश्वर यानी कि परमात्मा। यानी कि अनुसूल समय। एक दिन में 30 मुहूर्त होते है। और इन 30 मुहूर्त में आठ प्रहर होते है। इन आठ प्रहर में चार दिन के होते है उनके नाम है- पूर्वान्ह, मध्यान्ह, अपरान्ह और सायंकाल इसी तरह रात में चार प्रहर होते है जिनके नाम है- प्रदोष, निशिथ, त्रियामा और उषा।

इसके साथ ही सूर्योदय के पहले के दो मुहूर्त होते है। उनमें से पहला होता है ब्रह्म मुहूर्त। ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 4:24 से 5:12 मिनय के बीच का होता है। इसलिए इस मुहूर्त में उठकर ये काम करना चाहिेए। सबसे पहले उठकर अपने हाथ को देखते हुए इस श्लोक को बोलना चाहिए।

करागे वसति लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती। कर मूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम।

इससे माता सरस्वती सहित सभी देवी-देवताओ की आपके ऊपर कृपा बनी रहेगी।

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