आज से चातुर्मास शुरू, चार महीनों तक नहीं होंगे मांगलिक कार्य

 

हिन्दू पंचांग के अनुसार आज आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। इसे देवशयनी एकादशी भी कहा जाता है और आज से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है। इसके साथ ही आज से सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग गया है। दरअसल, चातुर्मास को देवताओं का शयन काल माना जाता है। इस समयावधि में भगवान श्रीहरि योग निद्रा में विश्राम करते हैं। यह अवधि चार महीने के होती है। इस दौरान मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।

इस वर्ष के आरंभ में ही देवगुरु वृहस्पति और शुक्र के अस्त होने के कारण पहले ही विवाह जैसे मांगलिक संस्कार के लिए कम मुहूर्त थे। मार्च में कुछ विवाह हुए और 9 अप्रैल से दोबारा लॉकडाउन लग गया। जून में थोड़ा सा ढील मिला, तो अब आगे चातुर्मास आरम्भ हो रहा है। इस तरह 2021 के ज्यादातर मुहूर्त ग्रह गोचर की स्थिति और कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गए। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योग निद्रा में विश्राम करते हैं। इस बार इस समयावधि चंद्रमा के तेज गति से तिथियों का क्षय होने से पूरे 4 महीने नहीं होकर 3 दिन की कमी रहेगी। अर्थात् इस बार भगवान विष्णु 3 दिन कम सोएंगे। यह संयोग छह साल बाद पड़ा है। भगवान के शयन काल में शुभ कार्य नहीं होते। चातुर्मास में शादी के अलावा जनेऊ, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश, नए कार्य की शुरुआत समेत सभी शुभ कार्य प्रतिबंधित हो जाएंगे, लेकिन खरीदारी बिक्री पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

क्या है योग निद्रा माया
ब्रह्मावैवर्त पुराण के अनुसार एक बार योग निद्रा ने कठिन तपस्या कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया। उनसे प्रार्थना की कि भगवान आप मुझे अपने अंगों में स्थान दें, लेकिन श्री हरि ने देखा कि उनका अपना शरीर तो लक्ष्मी के द्वारा अधिकृत है। इस तरह का विचार कर विष्णु ने अपने नेत्रों में योग निद्रा को स्थान दे दिया और योग निद्रा को आश्वासन देते हुए कहा कि तुम वर्ष में 4 माह के लिए मेरे नेत्रों में आश्रित रहोगी।

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