हल्द्वानी: सरकारी अस्पताल में भी बढ़ीं सिजेरियन डिलिवरी

 

प्रसव के लिए अब भी सामान्य प्रसव का तरीका सही माना जाता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में सिजेरियन डिलिवरी कराई जाती है। सरकारी अस्प्तालों में निजी अस्पतालों की अपेक्षा सिजेरियन डिलिवरी कम होती है लेकिन अब यहां भी सिजेरियन डिलीवरी का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।

निजी अस्पतालों में तो सिजेरियन डिलीवरी का ग्राफ बढ़ ही गया है। अब सरकारी अस्पताल में भी यह ग्राफ बढ़ता जा रहा है। कुमाऊं के प्रमुख राजकीय महिला अस्पताल में भी यही देखने को मिल रहा है। यहां अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के दौरान कुल 4754 प्रसव हुए।

इनमें सामान्य प्रसवों की संख्या 3008 है, जबकि इस दौरान 1716 बच्चों का जन्म सिजेरियन डिलीवरी से हुआ है। कुल जन्म लेने वालों में बच्चों में सिजेरियन डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चों की प्रतिशत 36.09 प्रतिशत रहा है। इस साल पिछले छह माह में महिला अस्पताल में 2053 प्रसव हो चुके हैं।

इनमें 1198 बच्चे सामान्य प्रसव से जबकि 855 बच्चे सिजेरियन डिलिवरी से पैदा हुए हैं। इनमें सिजेरियन डिलीवरी से जन्म लेने वाले बच्चों का प्रतिशत 41.26 प्रतिशत रहा। माना जा रहा है कि कोरोना काल की वजह से भी सिजेरियन डिलिवरी में संख्या बढ़ी है क्योंकि कोरोना के दौरान महिलाओं की गतिविधियां कम हुई हैं। जो सिजेरियन डिलिवरी के लिए जरूरी होता है।

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