नोएडा में शुरू हुई पहली यूनिट, हर साल 24 हजार गाड़ियां होंगी स्क्रैप

 

देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी Maruti और Toyota Tsusho Group’s ने मिलकर इय यूनिट का निर्माण किया है, जहां हर साल लगभग 24 हजार पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप में तब्दील किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इस प्लांट में हर महीने 2,000 वाहनों को स्क्रैप करने की क्षमता होगी और एक वाहन को स्क्रैप करने में तीन घंटे से अधिक समय लगेगा।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, गडकरी ने कहा, “प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्क्रैपेज नीति प्रमुख कारकों में से एक होगी। पुरानी कारें नई कारों की तुलना में बहुत अधिक प्रदूषणकारी होती हैं, इसलिए उन्हें चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की आवश्यकता है। हमें स्क्रैपेज नीति के कारण बिक्री 10-12 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है।”

उन्होंने कहा, “पुराने वाहन प्रदूषण का कारण बनते हैं जो समाज के लिए एक बड़ी समस्या है। स्क्रैपिंग अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमें सभी कच्चे माल कम लागत पर मिलेंगे जिससे हम उत्पादन लागत कम कर सकते हैं।”

INAUGURATING ‘SCRAPPING FACILITATION CENTRE’ OF MARUTI SUZUKI TOYOTSU INDIA PVT. LTD. (MSTI) HTTPS://T.CO/LBF8MGY7YX

— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) November 23, 2021

गडकरी ने यह भी कहा कि केंद्र देश के हर जिले में कम से कम कुछ ऐसे वाहन रीसाइक्लिंग या स्क्रैपिंग केंद्र शुरू करने की योजना बना रहा है। मंत्री ने कहा कि इस तरह के कदम से न केवल पुरानी कारों को खत्म करने की प्रक्रिया में आसानी होगी बल्कि अधिक रोजगार भी पैदा होगा, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। 

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के एमडी और सीईओ केनिची आयुकावा ने कहा, “कई देशों की तरह, हमें एक ऐसी नीति की आवश्यकता है, जहां हर 3-4 साल में वाहनों की फिटनेस की जांच की जाए। हमें 15 साल इंतजार करने की जरूरत नहीं है।”

टोयोटा त्सुशो समूह की पहली सरकार द्वारा अनुमोदित यह स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग सुविधा 10,993 वर्ग मीटर में फैली हुई है, जो मारुति सुजुकी टोयोत्सु इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित है। इस प्लांट को 44 करोड़ रुपये के निवेश से बनाया गया और यह स्क्रैपेज प्लांट केंद्र सरकार की वाहन कबाड़ नीति के अनुरूप है।

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