इटावा: पत्नी की मौत से प्रधान पद पर जीत लगी फीकी

 

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के महेवा ब्लाक के बहेडा ग्राम पंचायत के निर्वाचित प्रधान विजय प्रताप सिंह के लिए खुशी का मौका है लेकिन खुशी का प्रदर्शन करने की स्थिति मे उनका परिवार तैयार नही हो पा रहा है क्योंकि पत्नी की कोरोना संक्रमण के कारण मौत से परिवार अभी भी सदमे में है ।
कोरोना महामारी ने कई हंसते खेलते परिवारों को गमजदा कर दिया है।

ऐसा ही एक मामला महेवा विकासखंड के ग्राम पंचायत बहेड़ा का है ।

यहां से विजय प्रताप पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान पद का पर्चा भरा था।

घोषित नतीजे में विजय प्रताप सिंह 380 वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीत गए लेकिन उनकी पत्नी सुनीता सिंह अपने पति को प्रधान बनते देखने से पहले ही दुनिया से विदा हो गईं।

सुनीता ने भी अपना पर्चा डमी प्रत्याशी के रूप में भरा था।

19 अप्रैल को मतदान होने के बाद सुनीता सेंगर को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया और तमाम प्रयास के बाद भी उनको बचाया नहीं जा सका।

30 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई।

मतगणना में विजय प्रताप सिंह सेंगर को विजेता घोषित किया गया ।

विजय प्रताप सिंह 380 वोटों के अंतर से जीते।

विजय प्रताप सिंह को कुल 814 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंदी प्रत्याशी को 434 वोट मिले लेकिन सुनीता सेंगर पति की विजय की खुशी नहीं मना पाई उससे पहले ही दुनिया से चली गई।

निर्वाचित ग्राम प्रधान का कहना है कि सुनीता जीवित होती तो खुशी की बात ही अलग होती ।

उन्होंने बताया कि पत्नी की इच्छा उनको प्रधान बनते देखने की थी लेकिन ईश्वर ने परिणाम से पहले ही सुनीता को छीन लिया।

विजय प्रताप की पहचान इस इलाके मे बडे समाजसेवियो के तौर पर होती है ।

उन्होने अपने गांव मे दस बीघा जमीन पर हबर्ल पार्क का निर्माण किया हुआ है ।

आसपास पार्क की कमी थी बच्चे भी नहीं खेल पा रहे थे।

यह बात एक युवा को ऐसी लगी कि उन्होंने अपनी दस बीघा जमीन को हरे भरे पार्क के रूप में विकसित कर दिया।

पार्क में ब्लड प्रेशर रोगियों के लिए एक्यूप्रेशर पथ का कराया गया है और बच्चों को खेलने के लिये झूले भी लगवाए गए।

इस पार्क को आम लोगों आम लोगों को समर्पित किया गया है।

यहां बुजुर्ग जाकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं तो बच्चे खेलकर तरोताजा हो रहे।

सुबह शाम तो छोड़िये यहां पूरे दिन रौनक रहने लगी है।

विजय प्रताप सिंह पूर्व में अपने गांव के करीब 250 साल पुराने शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था, उसके बाद साल भर पहले मंदिर के सामने ही पड़ी 10 बीघा जमीन पर गांव वालों व क्षेत्र वालों के लिए पार्क में चारों ओर हर किस्म के पौधे व फूल लगवाए।

सेंगर बताते हैं कि पार्क ग्रामवासियों व क्षेत्रवासियों के लिए ही समर्पित है।

पार्क में बबूगोसा, आम, चीकू, सिदूर, लीची, नाशपाती, बेर, इमली, बांस, नीबू, संतरा, कटहल, अशोक, बहेड़ा, अंजीर, चेरी, करौंधा, अखरोट, फालसा, अनार, अमरूद, नारियल, आंवला, कमरख, कागजी नीबू, जामुन, पपीता, हरसिगर, रातरानी, ढाक, केला, मौसमी, अमरूद, अमेरिकन कपास, काजू, पिस्ता, बादाम, वाटर एप्पल, इलायची, कीनू, सेजना, चंदन, मीठा नीमम, शरीफा, कदम, बड़ा, चकोतरा, सेब, कल्प वृक्ष, तुलसी, एलोबेरा सहित आधा सैकड़ा से अधिक प्रजातियों के पौधे मौजूद हैं।

पार्क की सुंदरता के लिए दर्जनों प्रकार के फूलों के पौधे लगवाए गए हैं, जिसमें गुलाब, गेंदा, चम्पा, चमेली, रात रानी, कनेल, डेलिया, हरसिगार आदि के फूल वातावरण को सुरम्य बनाते हैं।

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