भाई को मुखाग्नि देने के 4 दिन बाद पिता भी नहीं रहे; पीपीई किट पहन बेटी फिर श्मशान पहुंची

 

पिता और भाई अस्पताल में तो मां को लॉज में किया आइसोलेट, रोजाना दोनों जगह की सेवा
युवती तनवी पर संक्रमण के दर्द की शुरुआत करीब 15-20 दिन पहले शुरू हुई थी। भाई शुभम और पिता अवधेश सक्सेना सहित मां संक्रमित हो गई थीं। चार दिनों पहले 32 वर्षीय बड़े भाई शुभम की सांसें थम गई। इसके बाद भी तनवी भाई की मौत के गम पर पत्थर रख पिता की अस्पताल में तो मां को शाजापुर की एक लॉज के कमरे में आइसोलेट कर सेवा करती रही। पर

होनी को अभी तनवी की और कठिन परीक्षा लेनी थी, सोमवार को पिता का भी निधन हो गया। छोटी सी उम्र में पूरे परिवार को बिखरते देखने के बाद परिवार की अन्य महिलाओं को उसकी संक्रमण से लड़ने की हिम्मत ही मरघट तक ले आई।

चाचा गोपालचंद्र और भाई लवली गुना में भर्ती, अंतिम संस्कार के समय सिर्फ महिलाएं ही थी
तनवी के चाचा गोपालचंद्र और चचेरा भाई लवली गुना के अस्पताल में भर्ती हैं। भाई शुभम और पिता की मौत के बाद अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी बेटी को निभानी पड़ी। पिता का कार्यक्षेत्र होने के बाद भी यहां न तो कोई परिजन साथ में था, न सगे-संबंधी। शुभम की मौत के समय पत्नी नेहा सक्सेना व दो साल की बेटी देवांशी चेहरा तक नहीं देख सके। ऐसे में शहर के युवा मनीष सोनी और धर्मेंद्र शर्मा ने तनवी की मदद के लिए कदम बढ़ाए, क्योंकि पिता के शव को अकेले शांतिवन तक नहीं ले जा सकती थी। ऐसे में इन युवाओं ने शायद पिछले जन्म के संबंधों को निभाते हुए अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं जुटाई।

From around the web

>