धमतरी : धान के चौथी किश्त की राशि में 500 रुपये प्रति एकड़ कटौती को किसानों को दिये जाने की मांग 

 
धमतरी :  धान के चौथी किश्त की राशि में 500 रुपये प्रति एकड़ कटौती को किसानों को दिये जाने की मांग  धान के चौथी किश्त की अंतिम किश्त की राशि में 500 रुपये प्रति एकड़ कटौती को किसानों को दिए जाने की मांग को लेकर दो अप्रैल को छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के सदस्यों ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट में अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को ज्ञापन सौंपा।

धान के चौथी किश्त की अंतिम किश्त की राशि में 500 रुपये प्रति एकड़ कटौती को किसानों को दिए जाने की मांग को लेकर दो अप्रैल को छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के सदस्यों ने शुक्रवार को कलेक्टोरेट में अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को ज्ञापन सौंपा।

किसानों का कहना है कि अंतर की राशि में जो कटौती की गई है उसे जल्द से जल्द किसानों के खातों में जमा किया जाए, तभी किसानों के साथ न्याय होगा। अपर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष घनाराम साहू, नारायण साहू, महावीर साहू ने कहा कि धान की चौथी किश्त की अंतिम किश्त राशि में कटौती की गई है। यह किसानों के साथ वादाखिलाफी धोखा व अन्याय है। चुनाव के समय पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में वायदा किया गया था कि यदि कांग्रेस की सरकार सत्ता में आती है, तो किसानों को 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य दिया जाएगा।

किसानों की 2019 -20 की चौथी किश्त के अंतर की राशि में प्रति एकड़ 500 रुपये की कटौती की गई है। 2019 के लिए केंद्र सरकार द्वारा पतला धान का रेट प्रति क्विंटल 1835 रुपये व मोटा धान का रेट 1815 रुपये निर्धारित किया गया था। उस हिसाब से प्रत्येक किसान को 685 प्रति क्विंटल अंतर दिया जाना घोषित किया गया था जो राजीव गांधी न्याय योजना के अंतर्गत किसानों को चार किश्तों में दिया जा रहा था, लेकिन इस बार के अंतिम किश्त की राशि में 500 रुपये प्रति एकड़ की यानि कि 20 प्रतिशत राशि कम करके किसानों को दिया जा रहा था।

यह प्रमाणित है कि अभी जो राशि मिल रही है वह तीन किश्तों में दी गई राशि से कम है। यह राशि किसानों को एकमुश्त मिलनी चाहिए थी। उसके बावजूद ही किश्तों में देने के बाद कटौती की गई है। किसानों से किए गए वायदे से राज्य सरकार मुकर रही है। राजनीतिक दलों को चुनावी घोषणा पत्र बहुत ही सोच समझ कर तैयार करना चाहिए। यह वायदा किसानों के हित में किसी भी परिस्थिति में सरकार को निभाना चाहिए। अतः जो राशि काटी गई है उस राशि को किसानों के खातों में जमा करना चाहिए। मांग करने वालों में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ किसान यूनियन के सुदर्शन ठाकुर, महिपाल साहू, राम निहोरा निषाद, उपेंद्र साहू, रघुनाथ साहू सहित अन्य शामिल थे। 

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