मानवाधिकार हनन के सात मामलों में आयोग ने लिया संज्ञान

 

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मानव अधिकार हनन के सात मामलों में संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया है।
आयोग की ओर से आज जारी विज्ञप्ति में आयोग ने इंदौर जिले के देपालपुर तहसील के एक अधिकारी द्वारा कोरोना सख्ती के नाम पर नागरिकों का जुलूस निकालकर उनके साथ बदसलूकी करने के मामले में आयोग ने कमिश्नर एवं इंदौर कलेक्टर तथा तहसीलदार देपालपुर से दस मई तक प्रतिवेदन मांगा है।

इंदौर में बीते रविवार पलासिया स्थित ग्रेटर कैलाश (जीके) अस्पताल में एक महिला के शव को बंधक बनाने और हंगामा के मामले में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं अस्पताल प्रशासन से 10 मई तक प्रतिवेदन मांगा है।

वहीं ग्वालियर के कमलाराजा चिकित्सालय में तीन मरीजों की मौत पर हुए हंगामें के मामले में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा अधीक्षक, कमलाराजा चिकित्सालय से जवाब तलब कर प्रतिवेदन मांगा है।

इसी तरह शिवपुरी के मेडिकल कालेज में कोरोना आईोलेशन वार्ड और आईसीयू वार्ड में मरीजों के साथ बरती जा रही लापरवाही के साथ श्योपुर के जिला अस्पताल में बीते रविवार को आॅक्सीजन खत्म होने से तीन गंभीर मरीजों की हुई मौत के मामले में संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

इसी प्रकार सिवनी के जिला अस्पताल में प्रशासन द्वारा मरीजों को पलंग मुहैया नहीं कराये जाने और जमीन पर हो रहे उपचार के मामले में कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से एक सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।

मध्यप्रदेश के निवाडी जिले के कलेक्टर ने कोरोना संक्रमितों के लिये एक तुगलकी आदेश जारी कर दिया।

निवाडी शहर के चार वार्डाें में कोरोना संक्रमितों के बाहर घूमने की शिकायत मिलने पर कलेक्टर निवाडी आशिष भार्गव ने उनके घरों मेें ताला लगवा दिया।

संक्रमितों को जरूरी सामग्री के लिये बहुत अधिक परेशान होना पडा।

इस मामले में आयोग ने कलेक्टर से 10 मई तक प्रतिवेदन मांगा है।

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