भोपाल रेल मंडल ने 100 से अधिक आइसोलेशन कोच किये तैयार ,जरुरत पड़ने पर होगाउपयोग

 

कोरोना तेजी से फैल रहा है। इसको लेकर रेलवे ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली है। डेढ़ वर्ष पूर्व ट्रेनों के जिन कोचों को मोबाइल आइसोलेशन कोच में तब्दील किया था, उन्हें फिर से तैयार कर लिया है। कोचों में साफ-सफाई कर दी है। बिस्तरों का इंतजाम कर लिया है। जरूरी मेडिकल उपकरण भी रख दिए गए हैं। हालांकि इन कोचों की अभी जरूरत नहीं पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और रेलवे के पास पर्याप्त अस्पताल हैं और उनके बिस्तरों की संख्या भी पूर्व की तुलना में बढ़ा ली गई है।

बता दें कि इन मोबाइल आईसोलेशन कोचों का उपयोग दूसरी लहर के दौरान भोपाल में किया गया था। इन कोचों को प्लेटफार्म छह पर खड़ा किया था। इन्हीं मिनी वार्ड का रूप दिया था। इनके अंदर बिस्तर, दवाईयां, सिलेडर आदि की व्यवस्था थी। तब इनमें 70 मरीजों को भर्ती किया गया था। जुलाई 2021 तक कोच प्लेटफार्म पर ही खड़े करके रखे गए थें जिन्हें कोरोना नियंत्रण में आने के बाद हटा दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी कोच निर्माण कारखाना में इस तरह के कोच तैयार कराए थे। ये पुराने कोच ही है जिनमें मामूली बदलाव किया गया है। भोपाल रेल मंडल ने करीब 300 से अधिक कोच तैयार किए थे। इनमें निशातपुरा रेल कारखाना द्वारा तैयार कोच भी है। एक कोच को तैयार करने और उसे अस्पताल के मिनी वार्ड के रूप में विकसित करने में करीब पौने दो लाख से ढाई लाख रूपये का खर्च आया था।

भोपाल में तैयार कोच दिल्ली में आए थे काम

भोपाल में तैयार किए गए कोच दिल्ली भी भेज गए थे जहां पर कोरोना संक्रमितों को भर्ती किया गया था। डेढ़ वर्ष हो चुके हैं ये कोच अभी भी दिल्ली रेल मंडल के पास ही है। बाकी के कोच भोपाल रेलवे स्टेशन यार्ड में, निशातपुरा कोच फैक्ट्री में और कुछ जबलपुर रेल मंडल को भेजे गए हैं।

पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य प्रवक्ता राहुल जयपुरिया ने बताया कि कोच तो तैयार हैं। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन से बात भी हुई है लेकिन जहां तक संभव हो इनकी जरूरत नहीं पड़ेगी। सभी जिलों में स्थानीय अस्पतालों में सुविधाओं के साथ-साथ बिस्तरों की संख्या बढ़ा ली गई है। आक्सीजन प्लांट चालू हैं, आक्सीजन सिलेंडर भी उपलब्ध है।

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