Rajya Sabha elections akhilesh राज्यसभा चुनाव में अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा

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लखनऊ। चाचा शिवपाल सिंह यादव और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की नाराजगी के कारण उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 11 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विधानसभा और विधान परिषद के चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद राज्यसभा की 11 सीटों के लिए 10 जून को होने वाले चुनाव भी समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है। राज्यसभा की इन 11 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सात और सपा को तीन सीटें मिलना तय हैं। जबकि 11वीं सीट के लिए भाजपा और सपा के बीच में संघर्ष होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर सपा में अखिलेश यादव की वर्किंग से खफा पार्टी के तमाम नेता कोई ना कोई गुल खिला सकते हैं। इन नाराज विधायकों को एकजुट रखना और राज्यसभा जाने की मंशा रखने वाले पार्टी नेताओं को भी पार्टी में बनाए रखना अखिलेश यादव के लिए एक बड़ी चुनौती है। कहा जा रहा है कि यह चुनाव अखिलेश यादव के लिए एक बड़ा और बड़ा इम्तहान हैं।

इस कथन में सच्चाई है। वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पांडेय के अनुसार, शिवपाल यादव व आजम खां प्रकरण को लेकर सपा में पहले से ही खींचतान चल रही है। बसपा मुखिया मायावती भी आजम खान को लेकर अखिलेश यादव को राजनीतिक बबुआ साबित करने में जुटी हैं। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से सपा में शिवापाल और आजम खान की नाराजगी एक बड़ा मुददा बनी हुई है। शिवपाल यादव तो सपा द्वारा आजम खां की अनदेखी करने के सवाल पर अखिलेश ही नहीं मुलायम सिंह यादव को घेर चुके हैं। हालांकि अखिलेश यादव को कई बार यह कहा है कि उनकी पार्टी आजम खां के साथ है। लेकिन आजम खां व शिवपाल के साथ उनके समर्थक विधायक सपा मुखिया के इस कथन से संतुष्ट नहीं हैं और वह राज्यसभा चुनावों में 11वीं सीट के लिए होने वाली वोटिंग में इधर-उधर हो सकते हैं। इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सपा खेमे के लिए अपने उन विधायकों का एकजुट रख पाना बड़ी चुनौती होगी।

अखिलेश यादव की दूसरी चुनौती राज्यसभा जाने की मंशा रखने वाले नेताओं की बड़ी संख्या है। अखिलेश यादव की जिन तीन सीटों में जीत होनी है, उनमें एक सीट वह अपने सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया जयंत चौधरी को देंगे, ऐसा माना जा रहा है। रालोद सपा का गठबंधन काफी समय से चला आ रहा है। इसके अलावा यूपी के मुख्य सचिव रह चुके पूर्व नौकरशाह आलोक रंजन को अखिलेश यादव प्रत्याशी बनाना चाहते हैं। वे एक लंबे अर्से से सपा से जुड़े हुए हैं। आलोक रंजन ने इस बार के विधानसभा चुनाव में सपा का घोषणा पत्र तैयार कराने में अहम भूमिका निभाई थी। तीसरी सीट पर महाराष्ट्र से सपा नेता अबू हसन आजमी को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा है। इसके अलावा सपा के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर भी अपने बेटे को राज्यसभा भेजने की मंशा रखते हैं। अखिलेश यादव के एक नजदीकी नेता के अनुसार आजम खान भी अपने के हितैषी के लिए टिकट चाहते हैं। इनके अलावा भी सपा के कई नेता राज्यसभा के लिए अपनी दावेदारी जता रहे हैं।

सपा और उसके सहयोगी दल रालोद व सुभासपा के विधायकों की तादाद 125 है। इनके बूते वह चार सीट निकाल सकती है। परन्तु सपा के जो हालत वर्तमान में है, उसमें अखिलेश यादव यह लक्ष्य हासिल कर पाएंगे इसे लेकर सपा नेता अभी कोई दावा नहीं कर रहे हैं।