Operation Lotus happen in Jharkhand झारखंड में कब होगा ऑपरेशन लोटस?

यह लाख टके का सवाल है कि महाराष्ट्र की कहानी झारखंड में कब दोहराई जाएगी? यह अंदाजा सबको है कि ऑपरेशन लोटस की तैयारी चल रही है और उसी अभियान का ड्रेस रिहर्सल था, जिसके तहत 10 विधायकों ने राष्ट्रपति के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की। कांग्रेस इसे दूसरा रूप दे रही है। अनौपचारिक बातचीत में कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि पार्टी में कई महिलाएं विधायक हैं, जिन्होंने राष्ट्रपति की महिला उम्मीदवार को वोट किया तो यह भी कहा जा रहा है कि आदिवासी विधायकों ने पहली आदिवासी राष्ट्रपति के लिए वोट किया। ये कारण अपनी जगह हैं लेकिन यहीं है कि भाजपा के इशारे पर कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।

तभी राष्ट्रपति चुनाव के बाद झारखंड में गतिविधियां तेज हो गई हैं। रोज विधायकों के गुवाहाटी जाने की चर्चा उठ रही है तो भी विधायकों के मोबाइल बंद होने की खबरों की चर्चा हो रही है। जानकार सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र के अभियान की सफलता के बाद गुवाहाटी का महत्व बढ़ गया है। तभी झारखंड के कांग्रेस विधायकों के गुवाहाटी जाने की चर्चा हो रही है। सूत्रों के मुताबिक कम से कम दो विधायक गुवाहाटी घूम कर आए हैं। इसमें एक मुस्लिम विधायक हैं और दूसरे धुर ईसाई, अदिवासी बहुल सीट से जीते विधायक हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि उन्होंने असम में किससे मुलाकात की।

बताया जा रहा है कि दिल्ली में एक केंद्रीय मंत्री और पूर्वोत्तर के एक मुख्यमंत्री इस अभियान को हैंडल कर रहे हैं। महाराष्ट्र और राजस्थान के नेताओं के विफल होने के बाद नई टीम इस काम में लगी है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में से एक बाबूलाल मरांडी भी एक विधायक के साथ दिल्ली आए थे और पार्टी के बड़े नेताओं से मिले थे। असल में उन्हीं की टीम इस बात का सबसे ज्यादा प्रचार कर रही है कि झारखंड में ऑपरेशन लोटस होने जा रहा है। परंतु मुश्किल यह है कि कांग्रेस में विभाजन कराने के लिए जरूरी 12 विधायकों की संख्या पूरी नहीं हो पा रही है। हर बार एक-दो विधायक कम रह जा रहे हैं।

ऐसा लग रहा है कि पार्टी आलाकमान सीधे इस मामले की निगरानी कर रहा है। जिस तरह से महाराष्ट्र में शिव सेना के बागी एकनाथ शिंदे सीधे भाजपा के शीर्ष नेताओं के संपर्क में थे उसी तरह झारखंड में कांग्रेस के बागी एक खास सूत्र के जरिए सीधे आलाकमान के संपर्क में हैं। प्रदेश भाजपा के ज्यादातर नेताओं को इसका अंदाजा नहीं है कि क्या हो रहा है। सब अंधेरे में हाथ-पैर मार रहे हैं। पार्टी आलाकमान अपने भरोसे के लोगों के जरिए कांग्रेस विधायकों के अलावा दो-तीन अन्य विधायकों से भी संपर्क में है। ध्यान रहे भाजपा के 26 और उसकी सहयोगी आजसू के दो विधायकों के साथ कांग्रेस के 12 विधायकों के मिलने पर भी आंकड़ा बहुमत से एक कम रहता है। इसलिए अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है।