इस मणि के लिए कभी हुआ था युद्द,आज सुरक्षित है इस किले में

 
पारस मणि के बारे में सब जानते है। जिससे लोहा भी सोना बन जाता था। माना जाता है कि इसे भगवान शिव अपने रूद्राक्ष में धारण करते थे। किदवंतियों के अनुसार माना जाता है कि नागमणि को भगवान शेषनाग धारण करते हैं। नागमणि सिर्फ नागों के पास ही होती है।नाग इसे अपने पास इसलिए रखते हैं ताकि उसकी रोशनी के आसपास इकट्ठे हो गए कीड़े-मकोड़ों को वह खाता रहे। आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां पर आज भी पारस मणि का उल्लेख मिलता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हम बात कर रहे है रायसेन जिले की।जो मध्य प्रदेश में स्थित है। ये किसी समय एक किला था। लेकिन अब ये खंडर में बदल चुका है। जब खानवा के युद्द में बाबर के विरूद्ध लड़ाई हुई थी तो बाबर ने पारस पत्थर कोइश किले में छिपा दिया था। आज तक इस पत्थर को किसी ने भी नही देखा है।लेकिन आज भी लोगों का मानना है कि ये किले में मौजूद है। क्योंकि किले के बीच में एक कुआ है जिसमें से रोशनी आती रहती है। बहुत बार लोग इस किले में खुदाई के लिए आते हैं और निराशा ही हाथ लगती है। माना जाता है कि  यह पत्थर किले के एक राजा के पास था और उन्होंने इस पत्थर के कारण कई बड़े-बड़े युद्ध जीत लिए थे।एक बार जब उन्हें लगा कि वह युद्ध हारने वाले हैं तब उन्होंने पारस पत्थर को किले में मौजूद तालाब में फेंक दिया जहाँ वह आज भी है।

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