ये गणेश जी का ऐसा मंदिर जो दर्शाता है जीवन से जुड़े दृश्य को,जानिए

 
 इस देश में जगह-जगह आस्था और विश्वास के अद्भुत उदहारण देखने को मिलते हैं।देश के कई लोग अपने घर में होने वाले हर मंगल कार्य का पहला कार्ड यहां भगवान गणेश के नाम भेजते हैं। आज हम आपको गणेश जी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जो अपनी अलग विशेषता के लिए जाने जाते है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हम बात कर रहे है मनाकूला विनायगर मंदिर की। जिसको सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात है कि इसमें कई दृश्य ऐसे है जिनमें भगवान गणेश की जिवनी का विस्तार किया गया है।जिसमें इनके जन्म से लेकर विवाह तक सारी कथाए छिपी हुई है। शास्त्रों में गणेश के जिन 16 रूपों की चर्चा है वे सभी मनाकुला विनायगर मंदिर की दीवारों पर नजर आते हैं।इस मंदिर का मुख सागर की तरफ है इसीलिए इसे भुवनेश्वर गणपति भी कहा गया है। तमिल में मनल का मतलब बालू और कुलन का मतलब सरोवर होता है।प्राचीन कथाओं के अनुसार पहले यहां गणेश मूर्ति के आसपास ढेर सारी बालू थी, इसलिए ये मनाकुला विनायगर कहलाने लगे।मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि इस मंदिर निर्माण में हजारों किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है।इस मंदिर में गणेश जी की प्रतमिमा के अवाला भी 58 प्रतिमाएं स्थापित की गई है। हर साल विजयादशी के दिन गणेश जी इसी रथ पर सवार होकर विहार करते हैं। हर साल अगस्त-सितंबर महीने में मनाया जाने वाला ब्रह्मोत्सव यहां का मुख्य त्योहार है, जो 24 दिनों तक चलता है।

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