लोगों के लिए मिसाल बन गई है सरिता, पैसे नहीं हैं तो फ्री देती हैं खाना

 

मां एक योद्धा होती है अपने बच्चों को पालने और उनके लिए खुशियां जुटाने के लिए वो हर मुश्किल से सामना करती है। ऐसी ही एक सिंगल मदर है जो बेटी को पालने सड़क पर खाना बेचने लग गई। अपने हाथों से खाना बनाकर वो दूसरों का पेट भरती है बदले में उसे चंद पैसे मिल जाते है। इस मां के पास कोई ठेला, होटल या बड़ी दुकान नहीं है वो अपने स्कूटर पर भी बर्तन चूल्हा रखकर अपनी दुकान चला रही है।

इनकी एक बेटी है, जो कालेज में पढ़ती है। ये घर खर्चे के लिए दिल्ली के पीड़ागढ़ी में सीएनजी पंप के पास अपने स्कूटी पर राजमा चावल का स्टाल लगाती हैं. रेट, छोटा प्लेट 40 रुपये, बड़ा फुल प्लेट 60 रुपये पर.....अगर आपके पास पैसे नहीं भी हैं तो भी आपको ये भूखा नहीं जाने देंगी, "खाना खा लो, पैसे जब हो तब दे जाना या मत देना" ये कह कर आपको खिला देंगी, चाहे आप किसी भी जाती धर्म या सम्प्रदाय से जुड़े हुए हों। 

उन्होंने बताया की, ‘एक दिन राजमा चावल बनाकर स्कूटी पर लादे और पीरागढ़ी बेचने चली गईं। पहले उन्होंने सोचा कोई खरीदकर खाएगा तो ठीक है वरना वापस लौट आएंगी। पर पहले दिन ही रिस्पॉन्स अच्छा मिला। लोगों ने खाए। पैसे भी दिए। पैक भी करवाए। उनका बिजनेस चलने लगा। अब वो अपना घर भी चला रही हैं। बेटी को भी पढ़ा रही हैं। साथ ही साथ आसपास गरीब बच्चों के लिए स्कूल की ड्रेस, किताबें और जूते भी खरीदकर देती हैं।

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