PM मोदी से मिलकर बीजेपी अध्यक्ष नड्डा से मिलने पहुंचे योगी

 

यूपी में उभरी नाराजगी के सुरों के बीच मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ पीएम मोदी के बीच प्रधानमंत्री आवास पर बैठक हुयी। यूपी में संभावित फेरबदल और तमाम अटकलों के बीच यह मुलाकात बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री से मिलने के बाद योगी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने पहुंच गए हैं। इस मुलाकात को दोनों ही नेताओं ने शिष्टाचार भेंट बताते हुए ट्वीट भी किया। पीएम मोदी से मुलाकात से पहले दिल्ली में सीएम योगी खासे एक्टिव नजर आए। इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट कहा जा रहा है।

बता दें कि पीएस से मुलाकात से पहले कल गुरुवार शाम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले थे। दोनों के बीच यह मुलाकात करीब डेढ़ घंटे तक चली थी।यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर यह मुलाकात बहुत अह्म मानी जा रही है। बीजेपी का पूरा ध्‍यान पार्टी में बढ़ रहे मतभेदों को दूर करने पर केंद्रित है। पार्टी सीएम योगी आदित्‍यनाथ को बदलने पर विचार नहीं कर रही लेकिन मंत्रिमंडल में कुछ अन्‍य बदलाव किए जा सकते हैं। वरिष्‍ठ नेता बीके संतोष के नेतृत्‍व वाली टीम की ओर ये करीब एक सप्‍ताह पहले यूपी में सरकार को लेकर फीडबैक लिए जाने के बाद आज की बैठक हो रही है। इस टीम ने मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और सीएम के साथ समीक्षा बैठक की थी। बीजेपी के वैचारिक मागर्दर्शक राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) के दत्‍तात्रेय होसबोले अपनी यात्रा के दौरान कैडर में कथित तौर पर असंतोष के भाव महसूस करने बाद फीडबैक सेशन की सिफारिश की थी

सूत्र बताते हैं कि सभी रिपोर्टों में यह बात प्रमुखता से कही गई कि योगी सभी को साथ लेकर नहीं चल पा रहे हैं। रिपोर्ट में गैर ठाकुरों (सीएम योगी इसी ठाकुर जाति से हैं) विशेषकर ब्राह्मणों के बीच असंतोष के बारे में भी जिक्र है। भगवा वस्‍त्र धारण करने वाले सीएम योगी को पार्टी सांसदों और विधायकों के लिए ‘पहुंच से दूर’ बताया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि यूपी जब कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा था तब तो यह असंतोष, गहरी नाराजगी में बदल गया। पिछले दिनों दिल्ली से आए केन्द्रीय महासचिव बीएल संतोष ने All is well का संदेश दिया था। ऐसे में मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली जाने के सियासी निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं।

अब सियासी गलियारे चर्चाएं जो भी हो पर हालात बता रहे हैं कि फिलहाल यूपी को लेकर किसी तरह का बड़ा परिवर्तन नहीं होने जा रहा है। पार्टी के अंदरखाने यूपी में मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ असंतोष की खबरें आई हैं। इन नेताओं को का मानना है कि योगी सरकार ने कोविड संकट का सक्षम तरीके से सामना करने में ढिलाई बरती है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में कुछ ही महीनें का वक्त रह गया है। ऐसे में इस मुलाकात के राजनैतिक मायने निकालें जा रहे हैं। पार्टी के अंदर कुछ लोग इस मुलाकात को यूपी के कैबिनेट विस्तार से जोड़ रहे हैं। वहीं यूपी बीजेपी के संगठन में फेरबदल की बातें भी हो रही है।

पिछले दिनों लखनऊआए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने मुख्यमंत्री योगी से लेकर संगठन और सरकार के मंत्रियों तक की सुनी और उनकी क्षमता व योजना दृष्टि की थाह नापी। बैठकों में कोरोना में ऑक्सीजन व बेड की कमी और इस कारण बड़ी संख्या में हुई मौतों पर मुखर हुई नाराजगी की नब्ज टटोली गई। राष्ट्रीय महासचिव ने सरकार के प्रबंधन व तैयारियों के दावों की सच्चाई समझी, पंचायत चुनाव के भाजपा के पक्ष में अपेक्षित नतीजे न आने की वजहें भी जानीं। लौटते समय वे मुख्यमंत्री की पीठ भी थमथपा गए।

ऐसे में माना जा रहा है कि विधान सभा चुनावों को लेकर मंत्रिमंडल में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। दरअसल यूपी में लंबे समय बाद पूर्ण बहुमत पाकर और वह भी 1991 से ज्यादा विधायकों के साथ प्रदेश की सत्ता में आई है। ऐसे में संघ भी किसी भी स्थिति में प्रदेश को खोना नहीं चाहता है। उसे पता है कि यूपी हारने का मतलब क्या होता है? शायद इसीलिए राष्ट्रीय महामंत्री महामंत्री बीएल संतोष को इसीलिए लखनऊ भेजा गया था।

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