किसानों के ट्रैक्टर मार्च को लेकर पुलिस का रुख साफ- विरोध से नहीं आपत्ति, न बिगड़े कानून व्यवस्था

 

किसानों के संसद तक ट्रैक्टर मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस सतर्क हो गई है और इसने अपना रूख साफ कर दिया। दिल्ली पुलिस पिछले साल हुए हंगामें को ध्यान में रखते हुए सभी इंतजाम करती दिखाई दे रही है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर आयुक्त राकेश अस्थाना ने कहा है कि लोकतांत्रिक प्रदर्शन को लेकर किसी को आपत्ति नहीं है लेकिन किसी भी परिस्थिति में कानून व्यवस्था नहीं बिगड़नी चाहिए। बीकेयू नेता 29 दिसबंर को ट्रैक्टर और किसानों के साथ संसद मार्च निकालेंगे जिसको लेकर सावधानी काम लिया जा रहा है। पुलिस ने कहा, "हम कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं … एक समझौता है (किसानों के साथ), हम इस पर काम करेंगे। लेकिन किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था को खराब नहीं होने दिया जाएगा। किसी को भी लोकतांत्रिक विरोध पर आपत्ति नहीं है।"

इसके अलावा पुलिस कमिश्नर ने कहा कि  महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा,  "महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारे पास छह डीसीपी, आठ एसीपी और नौ एसएचओ हैं जो महिलाएं हैं – उन्हें उन क्षेत्रों में रखा गया है जहां महिलाओं से संबंधित समस्याओं की आशंका है।

 बता दें कि इससे पहले बीकेयू नेता राके टिकैत ने कहा था कि 29 नवंबर को शीत सत्र के पहले दिन 1000 लोग 60 ट्रैक्टर लेकर संसद की ओर कूच करेंगे। टिकैत ने कहा,  'जो सड़के सरकार द्वारा खोली गई हैं। उन सड़कों से ट्रैक्टर गुजरेंगे। हम पर पहले सड़कों को ब्लॉक करने का आरोप लगाया गया था। हमने सड़क को अवरुद्ध नहीं किया था। सड़कों को ब्लॉक करना करना हमारे आंदोलन का हिस्सा नहीं है। हमारा आंदोलन सरकार से बात करना है। हम सीधे संसद जाएंगे।'

भारतीय किसान यूनियन के नेता ने एएनआई से कहा, 'हम एमएसपी को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, पिछले एक साल में हुई घटनाएं, जिसमें 750 किसान मारे गए, सरकार को इसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।' एसकेएम ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय किसान संगठनों द्वारा भी दुनिया भर में "एकजुटता कार्यक्रमों" की  योजना बनाई जा रही है। संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू होगा और इसके 23 दिसंबर तक चलने की उम्मीद है।

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