SC ने कहा- कार्यस्थल पर पति का अपमान करना भी माना जा सकता है तलाक का आधार …

 

शादियों के बारे में अक्सर कहा जाता है कि जोड़ियां भगवान बनाता है. कुछ सालों से देखा जा रहा है कि जितनी जल्दी शादियां होती हैं उतनी ही जल्दी टूट भी जाती हैं. देश भर की कोर्टों में कई बार ऐसे मामले आते हैं जिनमें तलाक के लिए दी गई दलील चर्चा का विषय बन जाती हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्यस्थल पर पति का अपमान करना मानसिकता क्रूरता का उदाहरण है. कोर्ट ने कहा कि यह पति-पत्नी के बीच तलाक का भी आधार बन सकता है. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पति या पत्नी का एक एक दूसरे के खिलाफ लगातार मुकदमेबाजी भी क्रूरता के समान है. इन कारणों को भी तलाक का आधार माना जाना चाहिए.

Supreme Court On Divorce : 

तमिलनाडु के एक जोड़े का था विवाद

सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु के एक जोड़े के मुकदमे पर सुनवाई कर रहा केस के संबंध में बताया गया कि इस कपल की शादी 2002 में हुई थी. इसके 2 महीने बाद से ही पति पत्नी अलग हो गए थे और पत्नी ने 8 केस दर्ज किए. पति का कहना था कि उसकी पत्नी ने शादी के 2 दिन बाद ही कार्यालय पहुंचकर उसका अपमान किया था. पति का कहना है कि कार्यालय में सभी दोस्तों और सह कर्मियों के सामने पत्नी ने गुस्से में उसे गालियां तक दे दी थी. इसके बाद से लगातार पति और पत्नी अलग रह रहे थे. इस बात को 10 साल बीत गए लेकिन पत्नी ने पति को तलाक देने से इनकार कर दिया.

Supreme Court On Divorce :

कोर्ट ने दोनों को अलग होने का फैसला किया

इस जोड़े की शादी को समाप्त करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय ने दोनों को अलग होने का फैसला दिया. इस मामले में टिप्पणी करते हुए तो उसने कहा कि शादी के 3 महीने बाद ही शादी टूट गई थी. ऐसे में इतने सालों बाद आप दोनों के साथ रहने का कोई मतलब नहीं बन जाता. कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने एक-एक कर 8 बार पति पर अलग-अलग थानों से केस किए. इसी एक तरह की मानसिकता क्रूरता के तौर पर देखा जाना चाहिए.

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