SC ने परमबीर की याचिका सुनने से किया इनकार, कहा- जिनके घर कांच के हों, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते

 

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को बड़ा झटका लगा है, सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह की याचिका को न सिर्फ सुनने से इनकार ( SC refuses Parambir Petition) किया बल्कि टिप्पणी कि ‘जिनके घर कांच के हों, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते’ दरअसल परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा था, अनिल देशमुख के खिलाफ शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए मेरे खिलाफ जांच शुरू करवाई गई है। मामले राज्य के बाहर ट्रांसफर हों। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया। ( SC refuses Parambir Petition )

सुप्रीम कोर्ट ने परमबीर सिंह से कहा, “आप 30 साल से पुलिस बल में हैं। राज्य के बाहर अपनी पूछताछ चाहते हैं। आपको अपने बल पर संदेह नहीं हो सकता है। आप महाराष्ट्र कैडर का हिस्सा हैं और अब आपको भरोसा नहीं है आपके अपने राज्य का कामकाज? यह एक चौंकाने वाला आरोप है. ( SC refuses Parambir Petition )

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर की याचिका सुनने से SC ने मना किया। उन्होंने कहा था- अनिल देशमुख के खिलाफ शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए मेरे खिलाफ जांच शुरू करवाई है। मामले राज्य के बाहर ट्रांसफर हों।

SC की टिप्पणी- जिनके घर कांच के हों, वह दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते

— NIPUN SEHGAL (@SEHGAL_NIPUN) JUNE 11, 2021


मालुम हो कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सचिन वाजे को हर महीनें 100 करोड़ रूपये वसूली करनें का आदेश दिया था, परमबीर के इस आरोप के बाद अनिल देशमुख न सिर्फ गृहमंत्री पद से हटाए गए बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ परमबीर की याचिका पर सीबीआई जांच का आदेश भी दिया।

इस्तीफा देने के बाद अनिल देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके सीबीआई जांच रुकवाने की मांग की थी. इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर था, यानि सीबीआई जांच जारी रहेगी। अनिल देशमुख और महाराष्ट्र सरकार की याचिका ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- यह 2 बड़े पद पर बैठे लोगों से जुड़ा मामला है। लोगों का भरोसा बना रहे, इसलिए निष्पक्ष जांच ज़रूरी है। हम हाई कोर्ट के आदेश में दखल नहीं देंगे।

जस्टिस कौल ने कहा था कि जब गृह मंत्री पर आरोप पुलिस कमिश्नर ने लगाए हों तो क्या यह CBI जांच के लिए फिट मामला नहीं है.. यह आरोप ऐसे व्यक्ति का है जो गृह मंत्री जा विश्वासपात्र था। अगर ऐसा नहीं होता तो उसे कमिश्नर का पद नहीं मिलता। यह कोई राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का मामला नहीं है।

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