भूमि सुपोषण अभियान के लिए संघ में बैठकों का दौर शुरू

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 13 अप्रैल से देशभर में भूमि सुपोषण अभियान शुरू करेगा। किसानों को रसायन और कीटनाशक से पूरी तरह से मुक्त खेती की तरफ मोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि धरती, हवा और पानी को स्वच्छ करने के साथ ही लोगों को स्वस्थ रखा जा सके। कर्नाटक के बेंगलुरू में पिछले महीने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक में संघ ने जैविक खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया। इस अभियान के शुभारंभ के लिए संघ ने पूरे देश में बैठकों का दौर प्रारंभ कर दिया है। विदर्भ प्रांत के पदाधिकारियों की बुधवार को आभासी मंच पर हुई बैठक में विस्तृत चर्चा की गई।

भारतीय नव वर्ष के प्रथम दिन यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (13 अप्रैल) से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान से देश के प्रत्येक गांव के किसानों को जोड़ने की कोशिश होगी। संघ के विदर्भ प्रांत के कार्यवाह दीपक तामशेट्टीवार के मुताबिक 13 अप्रैल से संघ पूरे देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाएगा। तामशेट्टीवार के मुताबिक भूमि-सुपोषण का अर्थ है कि मिट्टी के आवश्यक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए काम किया जाए। भूमि सुपोषण के लिए रासायनिक खाद का इस्तेमाल रोकना होगा। वहीं पौधारोपण और जलसंवर्धन के साथ ही प्लास्टिक के इस्लेमाल को भी बंद करना होगा। 

तामशेट्टीवार के मुताबिक 13 अप्रैल से शुरू होने वाले इस अभियान को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। पहले हिस्से में भूमि सुपोषण, जैविक खेती, रासायनिक खाद का इस्तेमाल रोकना, प्लास्टिक मुक्ति; इन विषयों पर आलेख लिखे जाएंगे। यह आलेख समाचार पत्र, पत्रिकाएं और सोशल मीडिया पर जारी किए जाएंगे। वहीं अभियान के दूसरे चरण में स्वयंसेवक किसानों से मिलकर उनसे इन सभी विषयों पर विस्तृत बात करेंगे। 

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