बढ़ते कोरोना मामलों को लेकर Lockdown ही एकमात्र विकल्प : सुप्रीम कोर्ट

 

देश में कोरोना से बिगड़ते हालात को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन लगाने की बात कही है. कोर्ट ने कहा है कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें लॉकडाउन पर विचार कर सकती हैं.

बता दें कि कई राज्यों ने कोरोना कर्फ्यू लगाया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है.सुप्रीम कोर्ट ने रविवार रात सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि हम केंद्र और राज्य सरकारों से सामूहिक समारोहों और सुपर स्प्रेडर कार्यक्रमों पर रोक लगाने पर विचार करने का आग्रह करेंगे.

शीर्ष अदालत ने सरकारों से कहा है कि वे लोक कल्याण के हित में कोरोना की दूसरी लहर पर अंकुश लगाने के लिए लॉकडाउन पर विचार कर सकते हैं.अदालत ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए.

कोर्ट ने कहा कि वह लॉकडाउन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव से परिचित है, खासतौर पर गरीबों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है. इसलिए यदि लॉकडाउन लगाए जाने की आवश्यकता है, तो सरकार को गरीबों की जरूरतों को पूरा करने की व्यवस्था पहले करनी चाहिए.

देश में इस बार पिछले साल से ज्यादा हालात खराब हैं. कोरोना की पहली लहर के वक्त पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था, लेकिन अब जब स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है लॉकडाउन के बारे में कोई विचार नहीं कर रहा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि लॉकडाउन सबसे आखिरी विकल्प होना चाहिए. जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए लॉकडाउन जरूरी है. हाल ही में बेकाबू कोरोना पर काबू पाने के लिए एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने भी सख्त लॉकडाउन लगाने की बात कही थी.

डॉ. गुलेरिया ने कहा था कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर को हराने के लिए सख्त लॉकडाउन की जरूरत है, जैसा कि पिछले साल मार्च में लगाया गया था. उन्होंने कहा कि जहां भी संक्रमण दर 10% से अधिक है वहां स्थानीय स्तर पर पिछले वर्ष की तरह लॉकडाउन किया जाना चाहिए.

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