बंगाल में क्या पीछे के रास्ते से भाजपा आना चाहती है?

 

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं, भाजपा बुरी तरीके से पश्चिम बंगाल का चुनाव हार चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के मंसूबों पर पानी फिर चुका है. क्योंकि भाजपा पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने का सपना लंबे समय से सजाए हुए थी.

पश्चिम बंगाल में भाजपा द्वारा सरकार बनाने का सपना चकनाचूर हो चुका है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा को बुरी तरीके से हराया है. ममता बनर्जी ने प्रचंड जीत दर्ज की. पश्चिम बंगाल के नतीजे आने के बाद से ही पश्चिम बंगाल में लगातार हिंसा जारी है. पश्चिम बंगाल से लगातार हिंसा की खबरें आ रही हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 मई के बाद तृणमूल कांग्रेस के गुंडों को देख लेने की धमकी दी थी. इसके अलावा पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष खुलेआम धमकी दे रहे थे तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को. दिलीप घोष का कहना था कि हमने हाथ पाव चलाए तो बैंडेज कम पड़ जाएंगे.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को देख लेने की धमकी दी थी पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने. दिलीप घोष ने कहा था कि संभल जाओ वरना हाथ पैर टूटेंगे मर भी सकते हो. अब जबकि चुनावी नतीजे आ चुके हैं, तृणमूल कांग्रेस सत्ता में वापसी कर चुकी है. नतीजे आने के बाद से ही हिंसा लगातार जारी है.

स्वस्थ लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. लेकिन जिस तरीके से पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के नेताओं द्वारा खुलेआम धमकियां दी गई थी और उसके बाद जो हिंसा हो रही है, इसको कहीं ना कहीं जोड़कर देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी पश्चिम बंगाल की हिंसा पर वहां के राज्यपाल से फोन पर बात की है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग बंगाल की हिंसा की आड़ में बंगाल के अंदर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर कुछ भाजपा समर्थक पत्रकारों का कहना है कि बंगाल की हिंसा रोकने के लिए बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगे. जबकि सच्चाई यही है कि भाजपा बंगाल चुनाव हार चुकी है और भाजपा की हार इन लोगों को सहन नहीं हो रही है, इसलिए पीछे के दरवाजे से भाजपा को लाना चाहते हैं.


जो भी हो पश्चिम बंगाल में जारी हिंसा रुकनी चाहिए. देश इस समय महामारी से जूझ रहा है लाखों चिताएं जल रही हैं. महामारी की चपेट में आकर लाखों लोग अभी भी जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं, हॉस्पिटल में और कुछ अपने घरों में. ऐसे समय में राजनीतिक हिंसा कहीं से कहीं तक सही नहीं है. राजनीतिक हिंसा तो किसी भी समय सही नहीं है, लेकिन ऐसे समय में पूरा जोर महामारी से लड़ने पर होना चाहिए.

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