शस्त्र लाइसेंस मामला: CBI के रडार पर 14 पूर्व अधिकारी, 41 जगह की छापेमारी

 

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार को हथियार लाइसेंस रैकेट से जुड़े एक मामले में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली और मध्य प्रदेश में करीब 41 जगहों पर छापेमारी की। शस्त्र लाइसेंस रैकेट से जुड़े इस मामले में तत्कालीन आईएएस, जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा और निचले रैंक के सरकारी अधिकारियों के साथ ही लगभग पांच निजी व्यक्तियों (बिचौलियों/एजेंटों) और 10 गन हाउस और डीलरों सहित लगभग 14 तत्कालीन लोक सेवकों के आधिकारिक और आवासीय परिसरों पर छापे मारे गए।

एजेंसी ने चार आईएएस अधिकारियों सज्जाद अहमद खान (सेवानिवृत्त), बसीर अहमद खान, एम. राजू और प्रसन्ना रामास्वनी जी. के ठिकानों पर छापेमारी की है। सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों निसार अहमद वानी, एम. एस. मलिक, फारूक अहमद खान और बशीर अहमद खान के ठिकानों पर भी छापे मारे हैं। इसके अलावा एजेंसी ने तत्कालीन जिला सूचना अधिकारी संजय पुरी के ठिकानों पर भी छापेमारी की। जम्मू एवं कश्मीर में श्रीनगर, अनंतनाग, बनिहाल, बारामूला, जम्मू, डोडा, राजौरी, किश्तवाड़ के अलावा लेह, दिल्ली और मध्य प्रदेश के भिंड में छापेमारी की गई है।

कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद

तलाशी के दौरान हथियार लाइसेंस जारी करने, लाभार्थियों की सूची, एफडीआर में निवेश से संबंधित दस्तावेज और अन्य बिक्री आय, संपत्ति के दस्तावेज, बैंक खाते का विवरण, लॉकर की चाबियां, आपत्तिजनक विवरण वाली डायरी, हथियार लाइसेंस रजिस्टर, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, फोन और कुछ नकदी समेत पुरानी करेंसी, मोबाइल सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं। एजेंसी ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर सरकार के अनुरोध पर और भारत सरकार से आगे की अधिसूचना के बाद दो मामले दर्ज किए थे। एजेंसी ने 17 मई, 2018 को जम्मू-कश्मीर में 2012 से 2016 की अवधि के दौरान तत्कालीन राज्य जम्मू एवं कश्मीर में हथियार लाइसेंस जारी करने के आरोपों पर दर्ज की गई दो प्राथमिकी की जांच का जिम्मा संभाला है। यह आरोप लगाया गया है कि गैर-हकदार व्यक्तियों को 2.78 लाख से अधिक हथियार लाइसेंस जारी किए गए थे।

सीबीआई ने कथित रूप से जम्मू-कश्मीर के 22 जिलों में फैले उक्त सशस्त्र लाइसेंस जारी करने से संबंधित दस्तावेज भी एकत्र किए हैं। दस्तावेजों की जांच के दौरान, कुछ बंदूक डीलरों की भूमिका सामने आई है, जिन्होंने लोक सेवकों यानी संबंधित जिलों के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की मिलीभगत से अपात्र व्यक्तियों को इस तरह के अवैध हथियार लाइसेंस जारी किए थे। सीबीआई ने एक बयान में कहा, “यह भी आरोप लगाया गया है कि जिन लोगों को ये लाइसेंस मिले थे, वे उन जगहों के निवासी नहीं थे, जहां से ये हथियार लाइसेंस जारी किए गए थे।”

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