सिद्धू के अध्यक्ष बनने से नाराज कैप्टन की चुप्पी कहीं ला न दे तूफान

 

पंजाब में ‘जंग’ अभी जारी है। नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद कलह खत्म नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं, सिद्धू ने भी धन्यवाद देने में कैप्टन के नाम से परहेज किया। पर पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ अपने पिता की एक तस्वीर ट्वीट कर खुद को पारंपारिक कांग्रेसी बताया है। सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस का कप्तान बनाए जाने के बाद कैप्टन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस चुप्पी को उनकी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि कैप्टन किसी कीमत पर सिद्धू को अध्यक्ष बनाए जाने के हक में नहीं थे। सिद्धू को रोकने के लिए उन्होंने अपने धुर विरोधी प्रताप सिंह बाजवा से भी हाथ मिलाया। पंजाब से कांग्रेस के दस सांसदों ने भी रविवार शाम पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखकर सिद्धू को अध्यक्ष नहीं बनाने की अपील की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सोनिया गांधी ने पत्र लिखने वाले सांसदों से फोन कर बात की। इसके बावजूद सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया। ऐसे में माना जा रहा है कि आलाकमान ने अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। मुख्यमंत्री कैप्टन की तरफ से बुधवार को सभी विधायकों को लंच पर आमंत्रित करने की भी खबर आई। इस लंच में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू को आमंत्रित नहीं किया गया था। इसको कैप्टन की तरफ से पार्टी नेतृत्व के फैसले के विरोध के तौर पर देखा गया। हालांकि, शाम को मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से इन खबरों का खंडन किया गया। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद सिद्धू ने ‘जीतेगा पंजाब’ मिशन की शुरुआत का ऐलान कर दिया। पर उनकी चुनौतियों की फेहरिस्त काफी लंबी है। एक तरफ जहां उन पर 2022 में पार्टी को जीत की दहलीज तक पहुंचाना है, वहीं सभी को साथ लेकर चलना भी उनके लिए बड़ी चुनौती है। वह अभी तक कैप्टन का खुला विरोध करते रहे हैं, पर अध्यक्ष के तौर पर उन्हें मुख्यमंत्री के साथ तालमेल बनाना होगा।

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