Maharashtra Floor test फ्लोर टेस्ट की अफवाह सच हो गई

पाकिस्तान के जाने-माने व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद यूसुफी ने लिखा है ‘हमारे मुल्क की अफवाहों की सबसे बड़ी खराबी ये है कि वो सच निकलती हैं’। यह बात भारत के बारे में अक्षरशः कही जा सकती है। ताजा मामला महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट का है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य की महा विकास अघाड़ी सरकार को बहुमत साबित करने के लिए गुरुवार यानी 30 जून को शाम पांच बजे तक का समय दिया है। इसके लिए उन्होंने विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाया है।

राजभवन की ओर से इसकी अधिसूचना जारी होने से कई घंटे पहले सोशल मीडिया में एक चिट्ठी वायरल हो गई, जिसमें बताया गया था कि राज्यपाल ने 30 जून को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें सरकार को बहुमत साबित करना होगा। जब चिट्ठी वायरल हुई और चारों तरफ चर्चा शुरू हुई तो राजभवन की ओर से विधिवत इसका खंडन किया गया। कहा गया कि ऐसी कोई चिट्ठी राजभवन ने नहीं जारी की है। लेकिन चंद घंटों के बाद ही उस कथित फर्जी चिट्ठी वाली अफवाह सच साबित हो गई। राजभवन ने 30 जून को विधानसभा का सत्र बुला लिया और सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कह दिया।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सचमुच पहली चिट्ठी फर्जी थी या राजभवन में पहले से चिट्ठी तैयार रखी गई थी? जिस समय चिट्ठी सोशल मीडिया में वायरल हुई उस समय तक भाजपा ने राज्यपाल से मिल कर सत्र बुलाने या सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहने की मांग नहीं की थी। असल में मंगलवार को दिन में भाजपा विधायक दल के नेता देवेंद्र फड़नवीस दिल्ली में थे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। दिल्ली से लौटने के बाद उन्होंने देर रात राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि सरकार अल्पमत में है और उसे बहुमत साबित करने के लिए कहा जाए।

लेकिन इससे पहले ही विधानसभा का सत्र बुलाने और बहुमत साबित करने वाली चिट्ठी वायरल हो गई थी। इससे ऐसा लग रहा है कि सब कुछ पहले से तय था और उसी योजना के मुताबिक काम हो रहा है। जब गुवाहाटी में शिव सेना के बागी विधायकों की संख्या दो-तिहाई यानी 37 से ज्यादा हो गई तभी तय हो गया था कि कब विधानसभा का सत्र बुलाना है और कब सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहना है। मंगलवार को तो उसकी औपचारिकता पूरी की गई।