Jharkhand politics draupadi murmu झारखंड में मुर्मू के बहाने

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झारखंड में ऐसा लग रहा है कि खेला हो गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ साथ कांग्रेस में भी खेल हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खुल कर द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया। पार्टी ने कहा है कि वे आदिवासी महिला हैं इसलिए उनको समर्थन दिया जा रहा है। हालांकि उससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में राजनीति भी देखी जा रही है। लेकिन उससे बड़ा घटनाक्रम यह है कि कांग्रेस के 18 में से करीब एक दर्जन विधायकों ने द्रौपदी मुर्मू को वोट दे दिया। झारखंड में पार्टी की इकलौती सांसद और कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष गीता कोड़ा ने भी मुर्मू को वोट किया। बचाव में सबका तर्क है कि मुर्मू आदिवासी थीं इसलिए उनको वोट दिया।

लेकिन असली कहानी कुछ और है। कांग्रेस के किसी विधायक या सांसद ने इस वजह से वोट नहीं दिया कि मुर्मू महिला हैं, आदिवासी हैं और झारखंड की राज्यपाल रही हैं। सबने भाजपा के ऑपरेशन लोटस के तहत वोट किया है। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इस क्रॉस वोटिंग को डिजाइन कराया। यह राज्य में जेएमएम की सरकार गिराने के अभियान का हिस्सा है। जो लोग ऑपरेशन लोटस में लगे हैं उनकी पहली परीक्षा राष्ट्रपति चुनाव में थी। उनको साबित करना था कि वे यह काम कर सकते हैं। इस अभियान के सफल होने के बाद अगर आलाकमान का भरोसा बन गया होगा तो अभियान आगे बढ़ेगा। फिर जल्दी ही महाराष्ट्र की कहानी दोहराई जा सकती है। जानकार सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के 18 में से 14 विधायक भाजपा के संपर्क में थे और मुर्मू को वोट डालने की सहमति दी थी। लेकिन बाद में कुछ विधायक पीछे हट गए। ध्यान रहे दलबदल कानून से बचते हुए कांग्रेस के टूटने के लिए 12 विधायकों की ही जरूरत है।