ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया क्या है ?

 

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (ओएसए) नामक रोग में सोते समय अक्सर सांस लेने की प्रक्रिया कुछ पलों के लिए रुक जाती है और इसके बाद यह फिर शुरू हो जाती है।

लक्ष्ण
    इतनी जोर से खर्राटे लेना कि अन्य लोगों की नींद में खलल पड़े।
    सोते हुए बीच-बीच में अचानक सांस नहीं आना, जिससे अक्सर पीडि़त व्यक्ति नींद से उठ जाता है।
    सोते समय बीच-बीच में सांस रुकना।
    दिन भर सुस्ती छाई रहना, जिससे व्यक्ति काम के दौरान, टेलीविजन देखते हुए या वाहन चलाते हुए सो सकता है।

किन लोगों को है जोखिम
    मोटापे से ग्रस्त लोगों को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया होनी की आशंकाएं ज्यादा होती हैं।
    गर्दन के मोटा होने से सांस मार्ग छोटा हो सकता है और यह स्थिति मोटापे का संकेत हो सकती है। पुरुषों के लिए गर्दन की माप 17 इंच और महिलाओं के लिए 16 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक होने पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया का जोखिम बढ़ जाता है।
    ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया होने की संभावना उन लोगों में दोगुनी हो जाती है, जिन्हें रात में अक्सर नाक बंद होने की समस्या रहती है।

जटिलताएं
इलाज न होने पर ओएसए से कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

कार्डियो-वैस्क्युलर समस्याएं
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया के दौरान रक्त के ऑक्सीजन स्तर में अचानक कमी आना, ब्लड प्रेशर बढऩा और कार्डियो-वैस्क्युलर सिस्टम पर दबाव बढऩा सरीखी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इस रोग से ग्रस्त कई लोगों में उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, जिससे दय संबंधी रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया जितना गंभीर होगा, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, दिल का दौरा पडऩा, दय की धड़कन रुक जाना और स्ट्रोक होने का जोखिम उतना ही बढ़ जाता है।
    दूसरों की नींद पूरी नहीं होना- तेज खर्राटों के कारण आपके आसपास के लोगों को भी सही तरीके से आराम नहीं मिल पाता। इसका असर आपके संबंधों पर भी पडऩे लगता है।

जांच
स्लीप स्टडी या पॉलीसोम्नोग्राफी की जाती है। इसके अंतर्गत पल्स ऑक्सीमेट्री (ऑक्सीजन), मस्तिष्क की तरंगें (ईईजी), दिल की धड़कन (ईकेजी), सीने और आंखों की स्थिति का अध्ययन किया जाता है।

आधुनिक जांच प्रक्रिया
आधुनिक तकनीक की मदद से आप इस रोग से संबंधित परीक्षणों को अपने घर में करा सकते हैं ताकि आपको अस्पताल में रात बिताने की जरूरत न पड़े। घड़ी की तरह दिखने वाली इस डिवाइस को आपकी उंगलियों के पौरों और बाजुओं पर लगा दिया जाता है, जिससे आपकी सोने की स्थितियों और आंखों की हरकतों पर नजर रखी जा सके।

निद्रा अध्ययन भी जरुरी
निद्रा-अध्ययन के माध्यम से आपकी निद्रा संबंधी समस्याओं की जांच की जाती है। यह निद्रा के दौरान आपके मस्तिश्क की गतिविधियों, दय गति, पांवों के संचलन, ऑक्सीजन के स्तर तथा श्वास-संचालन की 6 से 8 तक घंटे की रिकॉर्डिंग होती है।
 

निद्रा संबंधी सामान्य समस्याएं
       नींद आने में कठिनाई/समय लगना
       स्लीप एप्निआ जिसमें नींद के दौरान कभी-कभी साँस बंद हो जाती है
       खर्राटे लेना
       दिन में उनींदा लगना
       चीखते हुए, संभ्रम (कंफ्यूजन) अथवा घबराहट के साथ जागना यदि आपके अध्ययन से पता चलता है कि आप निद्रा संबंधी किसी अव्यवस्था के शिकार हैं तो आपके लिए सर्वश्रेश्ठ इलाज चुना जा सके, इसके लिए आपको एक और रात वापस आना होगा।

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