16 से 60 साल की की महिलाओं में बढ़ रही हैं यह समस्या, मां बनने में आती है दिक्कत

 
रसौली या फाइब्रॉइड एक ऐसी गांठ है जो यूट्रस यानि गर्भाश्य (बच्चादानी) में बनती है लेकिन यह कैंसर नहीं है। 16 से 60 साल की उम्र की महिलाओं को यह समस्या अधिक होती है। अक्सर महिलाएं रसौली का नाम सुनकर घबरा जाती हैं। हालांकि इसके कारण कंसीव करने और अनियमित पीरियड्स का सामना करना पड़ता है लेकिन आप सही इलाज और थोड़ी सी सावधानी से इस समस्या को दूर कर सकती हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं बच्चेदानी में गांठ या रसौली किन कारणों से होती है और इसके लक्षण व इलाज क्या है।

इस समस्या में महिला के गर्भाशय में कोई एक मांसपेशी असामान्य रूप से ज्यादा विकसित हो जाती है और यही धीरे-धीरे गांठ का रूप ले लेती है, जोकि एक तरह का ट्यूमर है। महिला के गर्भाशय में पाई जाने वाली ये गांठ मटर के दाने से लेकर क्रिकेट बॉल जितनी बड़ी हो सकती है।

गर्भाशय में होने वाली गांठ के कारण अंडाणु और शुक्राणु का न‍िषेचन नहीं होने के कारण बांझपन की समस्‍या होती है। आनुवंशिकता, मोटापा, शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा का बढ़ना और लंबे समय तक संतान न होना इसके प्रमुख कारकों में से एक हैं।

रसौली के लक्षण
-पीरियड्स के समय ज्यादा ब्लीडिंग
-संबंध बनाने के दौरान दर्द
-कमर, जांघों व पेड़ूं में दर्द व सूजन
-ज्यादा पेशाब आना और कब्ज
-पेट में भारीपन और ब्लोटिंग
-गर्भ ठहरने में दिक्कत
-शरीर में खून की कमी

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