खोई हुई वर्जिनटी वापस पाने के है ये आसान उपाय....

 
वर्जिन शब्द का अर्थ है, “अनछुआ”। वर्जिन होना सही है या गलत, ये चर्चा की विषय ही नहीं है। यहां वर्जिन शब्द से तात्पर्य है योनी के टाइट होने से। शिशु के जन्म के बाद, उम्र बढ़ने या एक्सरसाइज न करने आदि कुछ कारणों से योनी में ढीलापन आ जाता है। हालांकि इसे दूर किया जा सकता है और योनी को फिर से टाइट बनाया जा सकता है। यहां फिर से वर्जिन होने का यही अर्थ है। तो आइये जानते है इसके बारे में..... 

बढ़ती उम्र में पड़ता है फर्क - बढ़ती उम्र के साथ भी फर्क पड़ता रहता है, शोधकर्ताओं का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के गुप्तांगों की त्वचा पतली पड़ने लग जाती हैं और उनमें लचीलापन आ जाता है।

कीगल एक्सरसाइज से किया जा सकता है ठीक - लेकिन उसका भी इलाज है, कीगल एक्सरसाइज करने से मांसपेशियों को फिर से मजबूत बनाया जा सकता है। और कीगल एक्सरसाइज को किसी भी उम्र की महिलाएं कर सकती हैं।

उत्तेजना भी हैं जरूरी - डॉक्टर्स का मानना है कि अगर शारीरिक संबंध बनाते समय महिलाओं के गुप्तांग में ड्राइनेस हो तो इससे भी साइज में फर्क पड़ता हैं इसलिये शारीरिक संबंध बनाने के लिये पहले फोरप्ले जरूरी होता हैं। उत्तेजना के बाद संबंध बनाने से गुप्तांग के आकार पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता।

कोई भी दवाई या गोली का सेवन ना करें - आपको बता दें की फिर से वर्जिन बनने की कोई दवाई नहीं होती इसलिए कोई भी दवाई ना लें, अगर कोई प्रोड्क्ट ऐसा दावा भी करे तो भी उसपर विशवास मत कीजिए इससे आपको उल्टा कोई साइड इफेक्ट हो सकता है।

प्राकृतिक तरीकों से करें दूर - गुप्तांग का ढ़ीलापन दूर करने का एक सबसे अच्छा तरीका व्यायाम करना और योग करना हैं। निरंतर व्यायाम और योग करने से गुप्तांगों का ढ़ीलापन दूर किया जा सकता है।

संबंध बनाते समय रखें ये बात ध्यान - शारीरिक संबंध बनाते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखने से गुप्तांगों के ढ़ीलेपन से बचा जा सकता है। दरअसल चरम सीमा पर पहुंचते ही पर गुप्तांगों में मौजूद मांसपेशियों का संकुचन होता है। महिलाएं जितना चरम सीमा पर पहुंचती हैं, मासपेशियां उतनी ही टोन होती हैं, जिससे उनका आकार मजबूत रहता है। और गुप्तांग में ढ़ीलापन नहीं आता।

बच्चे को जन्म देने के बाद पड़ता है ये फर्क - एक शोध के मुताबिक महिला के बच्चे को जन्म देने के बाद उसके गुप्तांग की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं। जिसको दोबारा 6 महिनें में आकार में लाया जा सकता है, जिसमें व्यायाम की जरूरत पड़ती है।

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