जानिए रनिंग स्टैमिना बढ़ाने के आसान तरीके

 

अपने स्वास्थ्य के लिए सजग व्यक्ति अपने सामान्य ट्रेनिंग रूटीन से ज्यादा दौड़ लगाने की भी चाह रखता है। यहां तक कि अगर आप बहुत ज्यादा नहीं दौड़ते हैं तो आप अपने रनिंग स्‍टैमिना से अपनी फिटनेस का आंकलन कर सकते हैं। इस लेख में स्‍टैमिना बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूती देने के लिए कुछ तरीकों के बारे में बताया जा रहा है।

इंटरवल ट्रेनिंग
अंतराल प्रशिक्षण को स्प्रिंट इंटरवल ट्रेनिंग भी कहा जाता है। यह स्टैमिना बढ़ाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। अध्ययनों से भी यह साबित हुआ है कि नियमित इंटरवल ट्रेनिंग, खासकर हाई इंटरवल ट्रेनिंग करने से हृदय की क्षमता और स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।


इंटरवल ट्रेनिंग में पहले शरीर पर ज्‍यादा दबाव नहीं डाला जाता है और धीरे-धीरे नई चुनौतियों को इसमें जोड़ दिया जाता है। अगर आप स्पोर्ट्स में सक्रिय नहीं हैं और सोचते हैं कि इंटरवल ट्रेनिंग आपके लिए नहीं हैं, तो ऐसा कतई न सोचें। अपने लिए आप कुछ नए और अलग तरीकों को आजमा सकते हैं। मुख्य रूप से इंटरवल ट्रेनिंग निम्न दो तरीकों से की जा सकती है:

हाई इंटेनसिटी इंटरवल ट्रेनिंग:

इसमें लगातार हाई इंटेनसिटी एक्‍सरसाइज ट्रेनिंग दी जाती है और बीच-बीच में कुछ समय आराम करके हल्‍के व्‍यायाम भी किए जाते हैं। सामान्यतः यह प्रशिक्षित एथलीटों द्वारा किया जाता है। पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट से जुड़े अध्ययनों से पता चला है कि 8 सप्ताह तक इंटरवल ट्रेनिंग करने का फेफड़ों की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है। यह भी साबित हो चुका है कि इंटरवल ट्रेनिंग से एरोबिक और एनारोबिक दोनोंं ही एक्‍सरसाइज में शरीर की सहनशक्‍ति बढ़ती है।

लो इंटेनसिटी इंटरवल ट्रेनिंग:

लो इंटेनसिटी इंटरवल ट्रेनिंग, हाई इंटेनसिटी इंटरवल ट्रेनिंग जैसा ही है। लेकिन इसमें आने वाली एक्सरसाइज हाई इंटेनसिटी यानि उच्च तीव्रता वाली नहीं होती हैं। इस ट्रेनिंग को वह लोग आसानी से कर सकते हैं, जिन्हें हाई इंटेनसिटी इंटरवल ट्रेनिंग करने में दिक्कत आती है।

हाई इंटेनसिटी के साथ लो इंटेनसिटी ट्रेनिंग से रनिंग स्‍टैमिना बढ़ाने में मदद मिलती है।

जानिए इंटरवल ट्रेनिंग को आप अपनी दिनचर्या में कैसे शामिल कर सकते हैं:

कभी भी इंटेंस ट्रेनिंग से शुरुआत न करें। इसके बजाय पहले 15 से 20 दिनों के लिए 10 से 15 मिनट जाॅगिंग या वाॅर्मअप करें। आप वाॅर्मअप करने के लिए स्ट्रेचिंग या योगा भी कर सकते हैं।
वर्कआउट करने के लिए शेड्यूल तैयार करें। अगर आपने हाल-फिलहाल में ही एक्सरसाइज की शुरूआत की है तो एक सप्ताह में एक या दो ही सेशन करें, जिसमें कम से कम तीन दिन का गैप हो। इसे रिकवरी गैप कह सकते हैं। ऐसा कम से कम 6 हफ्तों तक करें।
इन 6 हफ्तों के दौरान अपने हार्ट रेट के साथ-साथ इस बात का भी ध्‍यान रखें कि आपको एक्‍सरसाइज के बाद कितने समय तक थकान रहती है। इससे आपको अपने अगले लेवल की ट्रेनिंग को शेड्यूल करने में मदद मिलेगी। यह जरूर ध्‍यान में रखें कि इस अवधि के दौरान आपकी हृदय गति कम रहे।
6 हफ्तों के बाद रिकवरी गैप को ध्यान में रखते हुए वर्कआउट सेशन की संख्या में वृद्धि करें। उदाहरण के तौर पर, अगर आपने लो हार्ट रेट नोटिस की है तो आपके लिए रिकवरी गैप को उसके अनुसार कम कर देना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
पिरामिड ट्रेनिंग के सिद्धांत का अनुसरण करें। अपने अगले स्तर की ट्रेनिंग की शुरूआत 1ः3 अनुपात के साथ करें यानी 45 सेकेंड की हाई इंटेनसिटी के बाद 15 सेकेंड लो इंटेनसिटी। धीरे-धीरे हाई इंटेनसिटी और लो इंटेनसिटी के समय को बढ़ाते रहें। अगले राउंड के लिए 50 सेकेंड हाई इंटेनसिटी और 15 सेकेंड लो इंटेनसिटी का टारगेट रखें।
धीरे-धीरे इंटरवल ट्रेनिंग सत्र (ट्रेनिंग सेशन) में बदलाव करें, जिसमें हाई इंटेनसिटी और लो इंटेनसिटी दोनों तरह की एक्सरसाइज शामिल हो। उदाहरणार्थ, शुरुआत में 30 सेकेंड हाई इंटेनसिटी एक्सरसाइज के साथ 10 सेकेंड लो इंटेनसिटी एक्सरसाइज करें। दूसरे राउंड में 10 सेकेंड हाई इंटेनसिटी एक्सरसाइज और फिर 20 सेकेंड लो इंटेनसिटी एक्सरसाइज करें।
लगभग 30 सेकेंड का ब्रेक लेकर आराम करें।
धीरे-धीरे समय अवधि को बढ़ाते हुए एक्सरसाइज दोहराएं और ट्रेनिंग की इंटेनसिटी भी बढ़ाते रहें।

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