क्या आपको पता है की 'बैड लक' की वजह से होते हैं ज्यादातर कैंसर

 
एक अध्ययन में यह बातें सामने आई है कि अलग-अलग टिशूज में हुए दो-तिहाई से अधिक कैंसर के पीछे ‘बैड लक’ को दोषी ठहराया जा सकता है क्योंकि इसके पीछे आदतों या वातावरण में होने वाला परिवर्तन महत्वपूर्ण कारक नहीं होता है।

जी हां! अमेरिका के जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन(JHUSM) के वैज्ञानिकों द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई हैं कि मानव शरीर में 31 तरह के टिशूज में से 22 तरह के टिशूज से जुड़े कैंसर के पीछे टिशूज में होने वाला अचानक परिवर्तन ही अधिक जिम्मेदार है।

अमेरिकी साइंस पत्रिका में हाल ही में छपे इस अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि विभिन्न प्रकार के कैंसर से जुड़ी घटनाओं के लिए बायोलॉजिकल डाटा के साथ मैथमेटिकल टेक्निक्स की गणना के माध्यम से ही आनुवंशिक गलतियों के वास्तविक योगदान की गणना की जा सकती है।

लेकिन वैज्ञानिकों ने खुद को और ऐसे डॉक्टरों को जो इस स्टडी से जुड़े नहीं थे को इस बात के लिए आगाह किया है कि कैंसर से जुड़े संकेतों के ना मिलने से जो लोग अपनी आदतों और पर्यावरण में होने वाले परिवर्तन को को इग्नोर कर देते है वही उनमें होने वाले कई तरह के कैंसर के पीछे का मुख्य कारक बन जाता है।

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक सहायक प्रोफेसर क्रिसचिएन टॉमसेट्टी ने दैनिक समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ को फोन पर बताया कि वास्तव में बहुत कम ही तरह के कैंसर ऐसे होते है जिनके पीछे आदतों और पर्यावरण में होने वाले परिवर्तन को इग्नोर करना मुख्य कारण होता है।

उन्होंने बताया कि हम इस तरह के संसाधनों को खोजने पर अपना ध्यान ज्यादा लगा रहें हैं जिससे की इस तरह के कैंसर को सही समय पर पता लगाया जा सके। वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए पहले से प्रकाशित मानव के विभिन्न 31 टिशूज में सेल डिविजन से जुड़े विश्लेषण के आंकड़ों का उपयोग किया। जिसमें उन्होंने यह पाया कि कैंसर होने के पीछे के कारणों और सामान्य तौर पर पूरे जीवन में टिशूज में होने वाले सेल डिविजन की संख्या के बीच एक मजबूत सकारात्मक संबंध होता है।

उनके इस अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला कि सिर और गर्दन के कैंसर, ग्लियोब्लास्टोमा नामक एक ब्रेन ट्यूमर और घेघा, पित्ताशय, ग्रहणी, अग्न्याशय के कैंसर उन्हीं 22 तरह में से एक होते हैं जिनके पीछे मुख्य कारण ‘बैड लक’ होता है। वहीं इसके विपरीत 9 ऐसे टिशूज भी होते हैं जिनके कैंसर के पीछे लोगों की आदतों या वातावरण में होने वाला परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

भारत में एक वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट ने लोगों को चेतावनी भी दी कि इस अध्ययन का गलत अर्थ नहीं होना चाहिए। वहीं मुंबई में टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक अनिल डी क्रूज़ का कहना है कि भारत में दर्ज़ सभी तरह के कैंसर में से आधे से अधिक कैंसर के पीछे तम्बाकू या उससे जुड़ी चीजें मुख्य कारण होती है। डी क्रूज़ ने कहा कि अगर लोग तम्बाकू और इस तरह के संक्रमणों से खुद को दूर कर लेतें हैं तो कैंसर की घटनाओं में काफी कमी हो जाएगी। 

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