हकलाहट को दूर कर साफ़ आवाज़ लाने के ये है आयुर्वेदिक उपाय

 
अधिकतर बच्चों में हकलाने और अटककर बोलने की बीमारी पाई जाती है और माता पिता को बच्चों की यह बीमारी असीमित परेशानी में डाल देती है, और बच्चों को निराशा से भर देती है और फिर, आजकल के मशीनी युग में बच्चों में यह बीमारी इतनी गहन भावनाएं पैदा करती है, कि विचारों और अनुभवों को शब्दों में परिवर्तित करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन आप घबराइए नहीं क्‍योंकि आयुर्वेद की मदद से आप हकलाने की समस्‍या का इलाज कर सकते हैं। तो आइये जानते है हकलाहट के आयुर्वेदिक उपचार....

# जिन लोगो को यह बीमारी होती है वो गुनगुने ब्राह्मी तेल से सिर पर 30 से 40 मिनट तक मालिश करें। उसके बाद गुनगुने पानी से नहा लें। इससे स्मरण शक्ति में सुधार होता है और अटककर और हकलाकर बोलने का दोष मिट जाता है।

# एक चम्मच सारस्वत चूर्ण और 1/2  चम्मच ब्राह्मी किरुथम शहद में मिला दें। इस मिश्रण को चावल के गोलों में मिलाकर मुंह में रखकर अच्छी तरह से चबाने से हकलाहट में लाभ मिलता है। बेहतर होगा अगर आप इसका सेवन नाश्ते के रूप में चटनी जैसा करें। नाश्ते के बाद 30 मिलीलीटर सारस्वतारिष्ट लेने से हकलाहट में लाभ मिलेगा।

# कुछ कोथमीर के बीज और पाम कैंडी वल्लाराई के पत्तों में रखकर चबाने से हकलाहट दूर हो जाती है। वल्लाराई के पत्तों को धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और इस पाउडर का नियमित रूप से सेवन करने से भी हकलाहट दूर हो जाती है।

# नियमित रूप से एक आँवले का सेवन करने से हकलाहट कम होती है । सुबह सवेरे एक चम्मच सूखे आँवले का पाउडर और एक चम्मच देसी घी का सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।

# 12 बादाम पूरी रात पानी में सोख कर रखें, और सुबह उनके छिलके उतार कर पीस लें, और उन्हें 30 ग्राम मक्खन के साथ सेवन करने से भी हकलाहट में लाभ मिलता है।

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