Delhi verdict and Kumar Vishwas दिल्ली का फैसला और कुमार विश्वास!

भारतीय जनता पार्टी को दिल्ली के बारे में कोई बड़ा फैसला करना है। आम आदमी पार्टी के नेता आशंकित हैं कि केंद्र सरकार दिल्ली विधानसभा भंग करके 1993 से पहले वाली स्थिति बहाल कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो अरविंद केजरीवाल पैदल होंगे। फिर उनके लिए राजनीति मुश्किल होगी। इस आशंका से ही केजरीवाल ने भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए हैं। पर सवाल है कि क्या सचमुच केंद्र सरकार दिल्ली विधानसभा भंग करेगी और अगर करेगी तो उसका समय क्या होगा? क्या भाजपा दिल्ली नगर निगम के चुनाव तक इंतजार करेगी या उससे पहले ही फैसला होगा?

कहा जा रहा है कि भाजपा एक चांस और लेगी। अरविंद केजरीवाल की कमान में आम आदमी पार्टी ने भाजपा को लगातार दो चुनाव हराया है। हालांकि उसमें कुछ गलती भाजपा की भी है। केजरीवाल का पहला चुनाव 2013 का था, जब उनको 28 सीटें मिली थीं और 32 सीट के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। तब भाजपा ने डॉक्टर हर्षवर्धन की कमान में चुनाव लड़ा था। पता नहीं है क्यों दो साल बाद भाजपा ने हर्षवर्धन को हटा दिया और किरण बेदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा, जिसमें पार्टी तीन सीटों पर सिमट गई। बहरहाल, 2015 और 2020 में भाजपा दो चुनाव हारी। लेकिन 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में सारी सीटें जीती और 2017 में दिल्ली नगर निगम का चुनाव भी जीता।

इसलिए भाजपा नगर निगम चुनाव में एक चांस और लेना चाहती है। कहा जा रहा है कि उससे पहले भाजपा दिल्ली के लिए एक नया चेहरा भी तलाश रही है। किरण बेदी से लेकर मनोज तिवारी तक को आजमाने के बाद अब पार्टी जाने-माने कवि और आम आदमी पार्टी के पुराने नेता कुमार विश्वास से बात कर रही है। वे किसी जमाने में केजरीवाल के बहुत करीब रहे हैं और आजकल केजरीवाल व आम आदमी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। दिल्ली की शराब नीति को सबसे पहले उन्होंने चुनौती दी थी और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम लिए बगैर उनके एक रिश्तेदार पर बड़ा आरोप लगाया था। अब उप राज्यपाल ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।

शराब नीति और मनीष सिसोदिया की सीबीआई जांच के फैसले के बाद कुमार विश्वास के भाजपा के साथ जुड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा में माना जा रहा है कि अब भी आम आदमी पार्टी में कुमार विश्वास को मानने वाले लोगों की संख्या बहुत बड़ी है। वे तटस्थ होंगे या भाजपा के साथ जुड़ेंगे। कुमार विश्वास ब्राह्मण हैं और उत्तर प्रदेश के हैं। इस नाते प्रवासी वोट भी भाजपा के साथ जुड़ सकता है। कविता और रामकथा ने उनकी लोकप्रियता बहुत बढ़ाई है। सो, भाजपा एक दांव उनके चेहरे पर लगाने की सोच रही है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेता उनके ट्विटर टाइमलाइन को खंगाल रहे हैं और भाजपा की आलोचना में किए गए ट्विट खोज कर निकाल रहे हैं।