BJP सांसद के विवादित बोल, कहा- सुभाष चंद्र बोस को गांधी ने मरवाया, फिर सफाई में दी ये दलील

जयपुर। राजस्थान के झुंझुनूं जिले से बीजेपी सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़ का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि सुभाष चंद्र बोस को गांधी जी ने मरवाया था। हालाँकि, इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद सांसद खीचड़ ने सफाई दी और कहा कि उनकी जुबान फिसल गई। कहने का मतलब कुछ और था जिसे तोड़-मरोड़ कर पेश कर दिया। महात्मा गांधी हमारे राष्ट्रपिता है। कोई ऐसा शब्द निकल गया हो तो मैं क्षमा चाहता हूं। हम तो महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने वाले हैं, हम राष्ट्रभक्त हैं। मैं महात्मा गांधी का पूरा सम्मान करता हूं।
बता दें, कि वायरल वीडियो की पुष्टि अमृत विचार नहीं करता।
वीडियो सामने आने के बाद सियासी हलकों में सांसद के इस बयान की चर्चा है। सांसद यह भी कह रहे हैं कि राजा महाराजाओं के समय से ही यह परंपरा रही है कि बेटा ही पिता का कत्ल करके राज करता है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के समय भी यह भावना थी।
बयान पर विवाद हुआ तो सांसद ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि मेरे कहने का मतलब वह नहीं था। मेरे कहने का मतलब था कि आजादी के बाद प्रथम प्रधानमंत्री सुभाषचंद्र बोस को बनना चाहिए था। गांधी चाहते तो सुभाषचंद्र बोस प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन गांधी ने जवाहरलाल नेहरू को प्राथमिकता दी। मेरे कहने का मतलब सामान्य भाषा में यह था कि गांधी के कारण ही सुभाषचंद्र बोस प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। गांधी ने सुभाषचंद्र बोस का पॉलिटिकल मर्डर कर दिया। आशय यह नहीं था कि गांधी ने बोस को जान से मरवा दिया या हत्या करवा दी।
गौरतलब है कि सांसद खीचड़ 25 जून को बाकरा गांव में स्वतंत्रता सेनानी श्योलाल खीचड़ की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में गए थे। झुंझुनूं में शनिवार को स्वतंत्रता सेनानी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सेना के सिपाही श्योलाल खीचड़ की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह प्रतिमा बाकरा गांव में लगी है। सैनिक कल्याण बोर्ड राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रेम सिंह बाजौर व झुंझुनूं सांसद नरेंद्र कुमार खीचड़ इस मौके पर मौजूद रहे।
श्योलाल खीचड़ बाकरा गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म छोटी देवी व जुगलाल खीचड़ के घर 1925 में हुआ था। श्योलाल कम उम्र से ही आजादी के आंदोलन में कूद पड़े। 16 साल की उम्र में 1941 में वे राज राइफल्स में भर्ती हो गए। इसके एक साल बाद ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रभावित होकर 1942 में आजाद हिन्द फौज में शामिल हुए। 1948 से 1952 तक श्योपाल खीचड़ राज राइफल यूनिट से जुड़े रहे। 22 नवम्बर 1992 को स्वतंत्रता सेनानी श्योपाल खीचड़ निधन हो गया।

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