bihar politics bjp JDU भाजपा व केंद्र के हर मुद्दे का विरोध

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बिहार में भाजपा की सहयोगी जनता दल यू ने केंद्र सरकार के हर फैसले और भाजपा की हर नीतिगत बात का विरोध करने का फैसला किया है। सेना में भर्ती की अग्निपथ योजना ताजा मिसाल है, जिसे वापस लेने के लिए जदयू के नेता केंद्र पर दबाव डाल रहे हैं। बिहार भाजपा के नेताओं का कहना है कि प्रदेश में हुई हिंसा और आगजनी को जदयू और सरकार का समर्थन था। इस मामले में जदयू के नेता विपक्ष की तरह बरताव कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि हर बार केंद्र सरकार का यह नियम हो गया है कि फैसला पहले हो जाता है और बातचीत उसके बाद शुरू होती है।

इसी तरह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इतिहास फिर से लिखने की बात कही तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे दो टूक अंदाज में खारिज किया और कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता है। जो घटनाएं घट गईं, उन्हें कैसे बदल सकते हैं। इसी बात को उनकी पार्टी के महासचिव केसी त्यागी ने दोहराया है और कहा है कि जो घटनाएं घट गईं वो अच्छी हो या बुरी उसे मिटा नहीं सकते हैं। ऐसे ही भाजपा के नेता जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग कर रहे हैं। लेकिन जदयू ने साफतौर पर इसे खारिज कर दिया है। जदयू नेताओं का कहना है कि हिंदू, मुस्लिम सभी समुदायों की जनसंख्या बढ़ने की दर स्थिर हो रही है इसलिए कानून की जरूरत नहीं है। भाजपा और जदयू के बीच जातीय जनगणना को लेकर भी विरोध है। भाजपा को जब लगा कि जदयू, राजद, कांग्रेस, लेफ्ट, हम, वीआईपी जैसी बिहार की सारी पार्टियां जातीय जनगणना के साथ हैं और राज्य सरकार आम सहमति से इस पर फैसला करने जा रही है तो वह भी मजबूरी में इस फैसले के साथ हो गई।