स्मार्ट सिटी और यातायात विभाग के विवाद में राजस्व की हानि

0
41

अमृत विचार, बरेली। ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही से हर माह सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। यह नुकसान आनलाइन चालान न होने से हो रहा है। ट्रैफिक लाइटें लगने के बावजूद ट्रैफिक पुलिस इसका उपयोग नहीं कर रही है। साथ ही जेब्रा लाइन नहीं होने की बात कहकर राजस्व हानि को बढ़ावा दे रही है।

Advertisement

स्मार्ट सिटी अफसरों का कहना है कि चालान के लिए जेब्रा लाइन का कोई मतलब नहीं है। दो विभागों के विवाद में केन्द्र और राज्य सरकार को हर माह लाखों रुपये का चूना लग रहा है। स्मार्ट सिटी के तहत 163 करोड़ की लागत से बने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आई ट्रिपल सी) स्थापित किया गया है।

योजना की मूल लागत तो 130 करोड़ है। इसमें 36 करोड़ जीएसटी लगी है। प्रोजेक्ट बनाने वाली कंपनी ने इसे तय समय से पहले पूरा कर लिया है। इसे सितंबर 21 में पूरा होना था, लेकिन कोविड काल में कई महीने काम नहीं होने के बाद भी प्रोजेक्ट को दिसंबर में चालू कर दिया गया था। केन्द्र सरकार के चार विभागों से एनओसी मिलने और परीक्षण के बाद ई-चालान सिस्टम चालू हो गया है, लेकिन बरेली में ई-चालान नहीं हो पा रहे हैं।

वर्तमान में लोग चौराहों पर रेट लाइट देखकर रुकते तो हैं लेकिन कुछ पल रुक कर नियम तोड़ते हुए उल्टी दिशा में निकल पड़ते हैं। इससे जाम लगने के साथ दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, लेकिन इसकी कोई रोकथाम नहीं हो रही है। ई चालान के लिए ट्रैफिक पुलिस को आमजन को जागरूक करना होगा। लगभग एक माह तक हर क्षेत्र में जागरुकता प्रशिक्षण के बाद पुलिस ई चालान करना शुरू कर सकती है। इस समय भी ई चालान निकल रहे हैं, लेकिन अभी वे अमान्य हैं।

इस तरह हो रही केन्द्र और राज्य सरकार को राजस्व हानि
ट्रैफिक नियम तोड़ने पर वाहन स्वामी के मोबाइल पर चालान होने का मैसेज आ जाएगा। चालान जमा करने की नियत तिथि भी दर्ज होगी। व्यक्ति जहां भी चालान राशि जमा करेगा उसका आधा हिस्सा केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी के खाते और आधा हिस्सा राज्य सरकार के खाते में जाएगा। जिले में जिस तरह से चालक चौराहों से वाहन निकालते हैं, उससे शुरुआत में तो काफी चालान कटेंगे। जितनी लापरवाही और नियम तोड़ते हुए वाहन चौराहा पार करेंगे उतने ज्यादा चालान कटेंगे और सरकार को राजस्व मिलेगा। इन्हीं चालान राशि का आधा हिस्सा केन्द्र और आधा राज्य सरकार के खाते में जाएगा। लेकिन यह हो नहीं रहा। इससे सरकार को हर माह लाखों रुपया का नुकसान हो रहा है।

जेब्रा लाइन नहीं है जरूरी
ट्रैफिक पुलिस जिस जेब्रा लाइन की अनिवार्यता की बात कह रही है। परियोजना के अधिकारी उसे जरूरी नहीं बताते हैं। जेब्रा लाइन जनता के आवागमन के लिए होती है। योजना के तहत हर चौराहे पर स्टॉप लाइन बनी है। इसके पीछे सभी वाहन चालकों को रुकना होगा। स्टॉप लाइन को क्रास करके खड़े रहने या बाइक का दूसरा पहिया लाइन पर आ जाने पर ही ई चालान कट जाएगा और तुरंत मोबाइल पर ई चालान का मैसेज आ जाएगा। चालान में एक लिंक भी दिया होगा। उस पर क्लिक करते ही आपको अपनी गलती का पूरा सचित्र सबूत मिल जाएगा कि आपकी किस गलती पर चालान काटा गया है।

सिस्टम सुरक्षित है और आडिट भी हो चुका
कंपनी ने जो प्रोजेक्ट लगाया है, वह पूरी तरह सुरक्षित है। इसका आडिट हो चुका है। तभी चालान कटना शुरू हुआ है। सरकार ने इसका आडिट किया और सुरक्षित मिलने पर ही इसे मंजूर किया है। सिस्टम का दिल्ली से एकीकरण हो गया है। चालान को मान्यता तभी मिलेगी जब कोई कर्मचारी कंट्रोल में बैठकर इन चालानों को अप्रूव करेगा।

अभिषेक आनंद, सीईओ स्मार्ट सिटी-
ई चालान से जेब्रा लाइन का कोई मतलब नहीं है। ई चालान शुरू कराने के लिए कुछ दिन पहले ही एसएसपी को पत्र भेजकर आग्रह किया गया कि ट्रायल बेस पर ही कुछ जंक्शन पर ई चालान की व्यवस्था शुरू कराई जा सकती है।

ये भी पढ़ें- बरेली: राज्य महिला आयोग की सदस्य ने सुनी महिलाओं की फरियाद, उचित समाधान के दिए निर्देश