विश्वविद्यालय के स्टेडियम में बाहरियों के प्रवेश पर रोक…

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बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। गुरुवार को बाहरी लोगों के पास चेक करने के बाद करीब 40 से 50 लोगों को रोक दिया गया। सिर्फ विश्वविद्यालय का आईकार्ड दिखाने वाले छात्रों को ही प्रवेश दिया गया। पूर्व में जारी करीब 100 बाहरी लोगों के पास निरस्त किए गए हैं।

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अब नए सिरे से पास बनाए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सिंथेटिक ट्रैक पर अधिक लोगों के दौड़ने से इसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है, जिसकी वजह से यह व्यवस्था लागू की गई हैं। वहीं विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं का कहना है कि किसी खास को प्रवेश न देने की वजह से ऐसा किया गया है।

विश्वविद्यालय के स्टेडियम में करीब कई करोड़ की लागत से सिंथेटिक ट्रैक बनाया गया है। कोरोना काल के दौरान प्रतियोगिताएं नहीं हुईं, लेकिन दिसंबर 2021 में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। स्टेडियम में विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ बाहरी लोगों को भी प्रवेश दिया जाता है। इसमें नौकरी के लिए दौड़ की तैयारी करने वाले युवा भी पहुंचते हैं। अभी तक पास क्रीड़ा सचिव के अलावा स्टेडियम के अन्य पदाधिकारियों के जरिए भी जारी हो जाते थे।

बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में काफी संख्या में रोजाना लोग दौड़ने के लिए पहुंच रहे थे। इनमें कई बाहरी छात्र नेता भी पहुंच जा रहे थे। ट्रैक पर अधिक संख्या में लोगों के पहुंचने से इसके खराब होने का खतरा बढ़ गया था। इसको लेकर क्रीड़ा सचिव ने सुरक्षा प्रभारी को बाहरी लोगों पर रोक लगाने के लिए कहा।
जिसके बाद गुरुवार को सुरक्षा प्रभारी ने सुबह सुरक्षाकर्मियों के साथ चेकिंग की। जिस पास पर क्रीड़ा सचिव के हस्ताक्षर थे या फिर विश्वविद्यालय का प्रवेश पत्र था, सिर्फ उन्हें ही प्रवेश दिया गया। अन्य सभी को रोक दिया गया। इसके अलावा उन लोगों को भी रोका गया, जिनके पास पर क्रीड़ा सचिव के हस्ताक्षर नहीं थे। इस मामले को लेकर छात्र नेताओं का कहना है कि जिनके हस्ताक्षर से पहले पास जारी हुए थे, उनका किसी से कुछ अंदरूनी विवाद हो गया है। जिसकी वजह से यह व्यवस्था लागू की गई है।

स्टेडियम में दौड़ने वालों की संख्या काफी बढ़ गई थी। सभी सिंथेटिक ट्रैक पर दौड़ रहे थे। इससे ट्रैक खराब होने की आशंका है। पूर्व के जारी सभी पास निरस्त कर दिए गए हैं। अब नए सिरे से पास जारी किए जाएंगे। —डा. आलोक श्रीवास्तव, क्रीड़ा सचिव रुविवि

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