रणजी का नया चैंपियन बना मध्यप्रदेश: 88 सालों में पहली बार ट्रॉफी हमारी, मुंबई को 6 विकेट से हराया

रणजी का नया चैंपियन बना मध्यप्रदेश: 88 सालों में पहली बार रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy 2022) जीतकर मध्यप्रदेश ने इतिहास रच दिया है. फाइनल (Ranji Trophy 2022 Final) में एमपी ने मुंबई को बुरी तरह से शिकस्त दी है. यह पहली दफा है जब क्रिकेट की दुनिया की सबसे बड़ी घरेलू ट्रॉफी हमारे घर आ रही हो. इसके पहले 23 साल पहले भी एमपी रणजी के फाइनल तक पहुंचा था, लेकिन कर्नाटक से हार का सामना करना पड़ा था. 

हालांकि इस बार मध्यप्रदेश की टीम ने मुंबई को 6 विकेट से हराकर ट्रॉफी जीत ली. मैन ऑफ द मैच (Ranji Final 2022 Man of the Match) का अवॉर्ड शुभम शर्मा को दिया गया. उन्होंने पहली पारी में 116 रन बनाए थे, वहीं दूसरी पारी में 30 रन का योगदान दिया. उन्हें 25 हजार रुपए का चेक दिया गया. वहीं मैन ऑफ द सीरीज (Ranji 2022 Man of the Series) का अवॉर्ड मुंबई के सरफराज खान को मिला.

मुंबई की जिस टीम को मध्यप्रदेश के लड़कों ने मात दी, वो इंटरनेशनल और IPL प्लेयर्स से सजी थी. 8 प्लेयर इंटरनेशनल तो 1 प्लेयर IPL खेल चुक है, जबकि हमारे यहां का कोई भी प्लेयर इंटरनेशनल लेवल पर कभी नहीं खेला. सिर्फ दो खिलाड़ी ही आईपीएल खेले. मुंबई के प्लेयर्स की औसत उम्र 25 से कम है, MP के प्लेयर्स 25+ हैं, यानी मुंबई के पास प्लेयर्स जरूर बड़े लेवल के हों, लेकिन अनुभव अपना काम कर गया.

अंतिम समय में ऐसे बढ़ती गईं धड़कनें

पहला विकेट 2 रन पर यश दुबे (1), दूसरा विकेट 54 रन पर हिमांशु मंत्री (37), तीसरा विकेट 66 रन पर पार्थ सैनी (5), चौथा विकेट 101 रन पर शुभम शर्मा (30). रजत पाटीदार 30 रन और आदित्य श्रीवास्तव 1 रन बनाकर नाबाद रहे.

यह सब करना आसान नहीं था: कप्तान टीम एमपी

“पूरी तरह से उत्साहित हूं. हम बेहद भावुक हैं. कप्तान के रूप में यह मेरा पहला साल था. मैंने जो कुछ सीखा है वह चंद्रकांत सर से है. मैं इसे जारी रखना चाहता हूं. यह बहुत ही शानदार है. अच्छा महसूस हो रहा है. यह सब करना आसान नहीं था.” – आदित्य श्रीवास्तव, कप्तान एमपी टीम

एमपी ने अच्छा खेला: कप्तान टीम मुंबई

“लड़कों ने जिस तरह से खेला है, वह अविश्वसनीय था. टीम में बहुत सारे नए लोग थे. एमपी ने अच्छा खेला. मैं अधिक समय तक बल्लेबाजी कर सकता था. इस साल नहीं, लेकिन निश्चित रूप से अगले साल हम जीतेंगे. सरफराज, मुलानी, पारकर, अरमान जाफर ने अच्छा खेला. वे टीम का भविष्य हैं.” -पृथ्वी शॉ, कप्तान, मुंबई टीम

टीम MP को मिली 2 करोड़ से ज्यादा प्राइज मनी

मध्यप्रदेश को विजेता बनने के साथ ही 2 करोड़ से ज्यादा की प्राइज मनी मिली. फाइनल खेलने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को बतौर मैच फीस 1.75 लाख रुपए मिलेंगे. लीग से सेमीफाइनल तक के मैचों के लिए प्रत्येक खिलाड़ी को मैच फीस के रूप में प्रति मैच 1.60 लाख रुपए मिले. फाइनल के लिए प्रत्येक खिलाड़ी को प्रतिदिन 35 हजार रुपए मैच फीस दी जाती है. लीग और सेमीफाइनल मैच 4 दिन के होते हैं. इनमें खिलाड़ियों को प्रत्येक दिन 40 हजार रुपए मैच फीस मिलती है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी बधाई

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए मध्यप्रदेश की टीम को बधाई दी. उन्होंने लिखा, ‘रणजी ट्रॉफी 2022 फाइनल मैच में अपने अद्भुत और अद्वितीय खेल से मध्यप्रदेश की टीम ने न केवल शानदार जीत प्राप्त की है, बल्कि लोगों का हृदय भी जीत लिया.’ साथ ही सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश की टीम का भव्य स्वागत किया जाएगा, उनका नागरिक अभिनंदन होगा.


फाइनल तक का टीम मध्यप्रदेश का सफर

पहला मैच

गुजरात को 106 रन से हराया

मध्यप्रदेश : 274 और 251

गुजरात : 331 और 88


दूसरा मैच

मेघालय को पारी और 301 रन से हराया

मेघालय : 61/137

एमपी : 499/6 विकेट पर पारी घोषित


तीसरा मैच

केरल से ड्रॉ खेला

एमपी : 585/9 पारी घोषित

केरल : 432/9


चौथा मैच

पंजाब को 10 विकेट से हराया

पंजाब : 219/203

एमपी : 397/26 विकेट पर पारी घोषित


पांचवां मैच

बंगाल को 174 रन से हराया

बंगाल : 219/203

एमपी : 397/26 विकेट पर पारी घोषित


फाइनल

मुंबई को 6 विकेट से हराया

मुंबई : 374 और 268 रन

मध्यप्रदेश : 536 रन और 108/4

महाराजा रणजीत सिंह के नाम पर रणजी ट्रॉफी

रणजी ट्रॉफी का नाम अंग्रेजों के अधीन रहे भारत में नवानगर (वर्तमान में जामनगर) स्टेट के महाराजा रणजीत सिंह के नाम पर रखा गया. वह 1907 से 1933 तक इस स्टेट के महाराजा रहे. भारत के पहले क्रिकेटर थे, जिन्हें इंग्लैंड की क्रिकेट टीम से खेलने का मौका मिला था. इंग्लैंड के लिए 1896 से 1902 के बीच 15 टेस्ट मैच खेले. यह वह दौर था जब भारत की क्रिकेट टीम नहीं हुआ करती थी. रणजीत सिंह की 1933 में मृत्यु के बाद 1934 में उनके नाम पर भारत में घरेलू टूर्नामेंट रणजी शुरू हुआ. पहला मैच 4 नवंबर 1934 को मद्रास और मैसूर के बीच चेपक के मैदान पर खेला गया. इस टूर्नामेंट के लिए पटियाला के महाराज की ओर से ट्रॉफी दान में दी गई थी.