मॉडल स्कूल में अव्यवस्थाएं, 500 से ज्यादा बच्चों ने नाम कटाया

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बरेली, अमृत विचार। परिषदीय स्कूलों की दशा सुधारने के लिए शासन की ओर से अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। अधिक से अधिक बच्चों को सरकारी विद्यालयों में प्रवेश के लिए स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की गई। नए बच्चों की संख्या में वृद्धि हुई, मगर दूसरी ओर ऐसे भी स्कूल हैं, जहां बच्चों की संख्या बढ़ने के बजाय कम हो गई। इसमें नगर क्षेत्र का जसौली स्थित माॅडल कंपोजिट स्कूल भी शामिल है।

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अव्यवस्थाओं के कारण इस स्कूल में अभिभावक बच्चों का प्रवेश कराने से कतरा रहे हैं। यही वजह है कि इस बार स्कूल से एक साथ पांच सौ से ज्यादा बच्चों ने नाम कटाकर दूसरे स्कूलों में प्रवेश ले लिया है। वर्तमान में स्कूल में 1340 बच्चे पंजीकृत हैं, जबकि इससे पूर्व के शैक्षिक सत्र में यहां 1839 बच्चे पंजीकृत थे। स्कूल चलो अभियान के तहत विद्यालय में 285 बच्चों के ही नए प्रवेश हुए हैं। सिर्फ एक वर्ष में बड़ी संख्या में छात्र संख्या घटने पर सवाल उठ रहे हैं। स्कूल चलो अभियान के तहत बीएसए समेत तमाम अफसरों ने घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक किया था। गांव से लेकर शहर तक अभियान चलाया गया था।

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आखिर क्यों न हो बच्चों की छात्र संख्या में कमी
बच्चों को स्कूल ड्रेस, बैग, शिक्षण सामग्री आदि के लिए शासन की ओर से डीबीटी के माध्यम से धनराशि सीधे अभिभावकों के खातों में भेजी जा रही है। इस बार भी अब अभिभावकों के खातों में धनराशि पहुंचना शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार पिछले वर्ष इस स्कूल के शत प्रतिशत छात्रों को डीबीटी का लाभ नहीं मिला था। स्कूल में पंजीकृत 1839 में से तीन सौ से ज्यादा छात्रों को ही डीबीटी के जरिए धनराशि प्राप्त हुई थी। स्कूल के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण स्कूल के आधे बच्चों को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं मिल सका।

कोविड जाने के कारण छात्र संख्या में आई कमी
इस संबंध में कंपोजिट स्कूल की प्रधानाध्यापक पूनम गंगवार का कहना है कि कोरोना काल में अधिकतर अभिभावकों ने टीसी प्राप्त करने की मंशा से बच्चों के प्रवेश कराए थे। सिर्फ पुराने पंजीकृत बच्चों को ही डीबीटी का लाभ मिल पाया है।

स्कूल का निरीक्षण कर इस संबंध में आवश्यक तथ्यों की जांच की जाएगी। बच्चों की इतनी संख्या में कम हो जाना ठीक नहीं है। लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगीएमएल वर्मा, बीईओ।

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