मुरादाबाद : फौजी पिता के सीने में सीडब्ल्यूसी अमरोहा ने बोया कांटा

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मुरादाबाद,अमृत विचार। अमरोहा की बाल कल्याण समिति ने चौंकाने वाले फैसले ने फौजी पिता के सीने में शूल बो दिया है। पांच वर्षों से नाबालिग बेटी के वियोग में वह करवटें बदल वक्त काट रहा है। पिता की वेदना समझने, तटस्थ न्याय करने की बजाय सीडब्ल्यूसी अमरोहा उस व्यक्ति के पाले में खड़ी है, जिस पर नाबालिग बेटी को मां-बाप से दूर करने का आरोप है। ऐसा दावा करने वाली मुरादाबाद सीडब्ल्यूसी ने आरोपी को किशोरी संग न्यायपीठ के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है।

सीडब्ल्यूसी मुरादाबाद के सदस्य हरि मोहन गुप्ता के मुताबिक नया मुरादाबाद की महिला ने एक पखवारे पहले पत्र दिया। बताया कि वर्षों पहले फौजी पति की तैनाती कश्मीर में थी। शादी के कुछ दिनों बाद दंपती पुत्री के मां-बाप बने। तब महिला अमरोहा गजरौला में रहने वाली बहन के घर आने-जाने लगी। कुछ वर्षों बाद महिला को एक पुत्र हुआ। पति का तबादला पठानकोट हो गया। फौजी सपरिवार पठानकोट जाने की तैयारी करने लगा। तब बड़ी बहन व बहनोई ने दोनों बच्चों को साथ ले जाने पर एतराज जताया। बहन-बहनोई बड़ी बेटी की परवरिश अपने पास करने का दबाव बनाने लगे। फौजी व उसकी पत्नी को झुकना पड़ा। बच्ची मौसी व मौसा को सौंप दी गई।

वक्त गुजरने लगा। फौजी जब भी बेटी वापस मांगता, तब साढू बहाना बना देता। पांच वर्ष पहले तब नया मोड़ आया, जब फौजी बेटी वापस लेने की जिद पर अड़ा। जिद का पता लगते रिश्तेदारों की पंचायत हुई। साढू ने फौजी को चुनौती दी। कहा बेटी वापस लेना तेरे बूते की बात नहीं। फौजी की पत्नी ने मुरादाबाद की सीडब्ल्यूसी को पत्र सौंपा। न्यायपीठ ने गजरौला में रहने वाली पीड़िता की बहन व उसके पति को नोटिस भेजा।

सीधा जवाब देने की बजाय साढू अमरोहा सीडब्ल्यूसी की शरण में चला गया। वहां से समिति के सदस्य ने मुरादाबाद में फोन पर संपर्क किया। प्रकरण अमरोहा ट्रांसफर करने को कहा। मुरादाबाद सीडब्ल्यूसी भौंचक रह गई। अमरोहा सीडब्ल्यूसी के सदस्य की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हुई। सीडब्ल्यूसी ने पीड़ित के मुरादाबाद के होने की दलील देते समझाने का प्रयास किया। आरोपी को नाबालिग समेत नौ जून को मुरादाबाद बुलाया गया। बगैर बच्ची साढू अमरोहा सीडब्ल्यूसी सदस्य के साथ मुरादाबाद पहुंचा। नाबालिग के दिल्ली में होने की दलील दी। बच्ची पेश करने की अगली तिथि लगातार बढ़ रही है। नाबालिग का कोई पता नहीं चल रहा।

बच्ची की सुपुर्दगी में हो गया खेल
मुरादाबाद बाल कल्याण समिति के सदस्य हरिमोहन गुप्ता के मुताबिक बच्ची की सुपुर्दगी में अमरोहा बाल कल्याण समिति ने खेल कर दिया। छानबीन में पता चला कि फौजी के साढू ने आठ जून में बाल कल्याण समिति को पत्र देकर बच्ची का संरक्षण मांगा। नौ जून को मांग स्वीकृत करते हुए अमरोहा सीडब्ल्यूसी ने बच्ची का अस्थाई संरक्षण फौजी के साढ़ू को दे दिया। सीडब्ल्यूसी के खेल का पता चलते सभी का सिर चकरा गया। प्रकरण में सीडब्ल्यूसी सदस्य की भूमिका सवालों के घेरे में है। फौजी ने बताया कि अस्थाई संरक्षण तय करने के दौरान उस पर बच्ची का परित्याग करने का झूठा आरोप मढ़ा गया। जबकि बेटी को दोबारा हासिल करने की कोशिश में वह दर-दर भटक रहा है।

बच्ची का संरक्षक तय करने में अमरोहा की बाल कल्याण समिति ने प्रथमदृष्टया चूक की है। बेटी फौजी की है तो उसकी सुपुर्दगी भी मां-बाप को होगी। बिटिया की उम्र 14 वर्ष है। नाबालिग पर मानसिक व शारीरिक दबाव डाल कर मनमानी कराने की संभावना से इंकार नहीं कर सकते। पूरे प्रकरण में प्रशासन व कोर्ट की भूमिका अहम है।-डॉ. विशेष गुप्ता समाजशास्त्री व बाल आयोग के पूर्व अध्यक्ष

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