मारुति यज्ञ – Live 7 TV

0
15

हमारे ऋषिमुनियों ने इष्ट की उपासना के अनेक मार्ग बताए है । इष्टदेव का षोडशोपचार या पंचोपचार पूजन , नाम स्मरण जाप , मंत्र जाप , स्तुति , स्तोत्र गान , भाव कथा कीर्तन , यज्ञ , यंत्र पूजा , ध्यान , योग बिगेरा …. योग्य विद्वान ब्राह्मणों को निमंत्रित करके बड़े यज्ञ भी किये जाते है और उपासक स्वयम भी नित्य यज्ञ या समयानुसार अपने घर पर भी सरलता से यज्ञ कर सकते है ।

इष्टदेव का आवाहन , पूजन , मंत्रजाप ओर जाप संख्या के दशांश अंक मंत्र की यज्ञमे आहुति देना ये यज्ञ है । घर पर ही हनुमानजी महाराज की प्रसन्नता केलिए सरल यज्ञ का विधान :-


ये भी पढ़ें …..

गुरु , गणपति ओर कुलदेवी की पूजा स्मरण करके हनुमानजी का आवाहन करे । मूर्ति या फ़ोटो की पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा करे ।

यज्ञ सामग्री :- हवनकुंड,
तिल,
अक्षत,
जौ,
शक्कर,
बिल्वपत्र,
गुड़,
चन्दन,
पलाश,
लवंग,
करवीरफल,
नागवल्ली,
शिवलिंगी,
गडूची,
शुद्ध घी आदि.

( ये सब हवन्द्रव्य ( पावडर )पूजा समान की दुकान पर तैयार मिलते है )

यह हनुमान जी का हवन करने का एक आसान विधि है.
इस विधि से हनुमान हवन करने के लिए किसी आसन पर बैठ कर हवनकुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित करें. उसके बाद ऊपर बताये गए सामग्री को शुद्ध घी मे मिलाकर हनुमान जी के प्रत्येक नाम का उच्चारण करते हुए प्रज्वलित अग्नि में आहुति प्रदान करें. हनुमान जी के इन मंत्रो को पढतें हुए प्रत्येक मन्त्र के बाद हवनकुंड में आहुति दें.

ॐ आञ्जनेयाय स्वाहा |
ॐ महावीराय स्वाहा |
ॐ हनुमते स्वाहा |
ॐ मारुतात्मजाय स्वाहा |
ॐ तत्वज्ञानप्रदाय स्वाहा |
ॐ सीतादेविमुद्राप्रदायकाय स्वाहा |
ॐ अशोकवनिकाक्षेप्त्रे स्वाहा |
ॐ सर्वमायाविभञ्ज्नाय स्वाहा |
ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे स्वाहा |
ॐ रक्षोविध्वंसकारका्य स्वाहा |
ॐ परविद्धापरीहराय स्वाहा |
ॐ परशौर्यविनाशाय स्वाहा |
ॐ परयन्त्रनिराकत्रे स्वाहा |
ॐ परयन्त्रप्रभेदका्य स्वाहा |
ॐ सर्वग्रहविनाशिने स्वाहा |
ॐ भीमसेनसहायकृते स्वाहा |
ॐ सर्वदुःखहराय स्वाहा |
ॐ सर्वलोकाचारिणे स्वाहा |
ॐ मनोजवाय स्वाहा |
ॐ पारिजातद्रुम-मूलवासाय स्वाहा |
ॐ सर्वमन्त्रस्वरूपवते स्वाहा |
ॐ सर्वयन्त्रस्वरूपिणे स्वाहा |
ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय स्वाहा |
ॐ कपीश्वराय स्वाहा |
ॐ महाकायाय स्वाहा |
ॐ सर्वरोगहराय स्वाहा |
ૐ प्रभवे स्वाहा |
ॐ बल सिद्धिकराय स्वाहा |
ॐ सर्वविद्धा संवित्प्रदायका्य स्वाहा |
ॐ कपिसेेनानायका्य स्वाहा |
ॐ भविष्यच्चतुराननाय स्वाहा |
ॐ कुमार ब्रह्मचारिणे स्वाहा |
ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते स्वाहा |
ॐ सच्चलद्वालसंत्रद्धरविमंडल-ग्रासोज्जवलाय स्वाहा |
ॐ गन्धर्व-विद्धातत्वज्ञानाय स्वाहा |
ॐ महाबल पराक्रमाय स्वाहा |
ॐ काराग्रह विमोक्त्रे स्वाहा |
ॐ श्रंृखला बन्धमोचकाय स्वाहा |
ॐ सागरोद्धारका्य स्वाहा |
ॐ प्राज्ञाय स्वाहा |
ॐ रामदूताय स्वाहा |
ॐ प्रजाभवते स्वाहा |
ॐ वानराय स्वाहा |
ॐ केशरिसुताय स्वाहा |
ॐ सीताशोकनिवारणाय स्वाहा |
ॐ अञ्ज्ना गर्भसम्भूताय स्वाहा |
ॐ बालार्कसद्रशाननाय स्वाहा |
ॐ विभीषणप्रियकराय स्वाहा |
ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय स्वाहा |
ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे स्वाहा |
ॐ वज्रकायाय स्वाहा |
ॐ महाद्धुत्ये स्वाहा |
ॐ चिरञ्जिविने स्वाहा |
ॐ रामभक्ताय स्वाहा |
ॐ दैत्यकार्य-व्याघातकाय स्वाहा |
ॐ यक्षहंत्रे स्वाहा |
ॐ काञ्चनाभाय स्वाहा |
ॐ पञ्चवक्त्राय स्वाहा |
ॐ महातपसे स्वाहा |
ॐ लंकिनीभञ्जनाय स्वाहा |
ॐ श्रीमते स्वाहा |
ॐ सिंहिकाप्राणभञ्जनाय स्वाहा |
ॐ गन्धमादनशैलहस्ताय स्वाहा |
ॐ लंकापुरविदाहकाय स्वाहा |
ॐ सुग्रीवसचिवाय स्वाहा |
ॐ धीराय स्वाहा |
ॐ शौर्याय स्वाहा |
ॐ दैत्यकुलान्तकाय स्वाहा |
ॐ सुरार्चिताय स्वाहा |
ॐ महातेजसे स्वाहा |
ॐ रामचूड़ामणिप्रदाय स्वाहा |
ॐ कामरुपिणे स्वाहा |
ॐ पिङ्गलाक्षाय स्वाहा |
ॐ वार्धिमैनाकपूजिताय स्वाहा |
ॐ कर्पूरीकृतमार्तण्डमण्डलाय स्वाहा |
ॐ विजितेन्द्रियाय स्वाहा |
ॐ रामसुग्रीवसन्धात्रे स्वाहा |
ॐ महारावणमर्द्दनाय स्वाहा |
ॐ स्फटिकभाय स्वाहा |
ॐ वागधीशायनमः स्वाहा |
ॐ नवव्याकृतिपण्डिताय स्वाहा |
ॐ चतुर्बाहवे स्वाहा |
ॐ दिनबन्धवे स्वाहा |
ॐ महात्मने स्वाहा |
ॐ भक्तवत्सलाय स्वाहा |
ॐ सञ्ज्ीवनगदाखड्गने स्वाहा |
ॐ शुचये स्वाहा |
ॐ वागिम्ने स्वाहा |
ॐ दृढव्रताय स्वाहा |
ॐ कालनेमिप्रमथनाय स्वाहा |
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय स्वाहा |
ॐ ध्वान्तध्वंसिने स्वाहा |
ॐ शान्ताय स्वाहा |
ॐ प्रसन्नात्मने स्वाहा |
ॐ दशकण्ठमदसंह्रते स्वाहा |
ॐ योगिने स्वाहा |
ॐ रामगदालोलाय स्वाहा |
ॐ सीतान्वेषणपण्डिताय स्वाहा |
ॐ वज्रदंष्ट्राय स्वाहा |
ॐ बज्रनखाय स्वाहा |
ॐ रूद्रवीर्यसमुभ्दवाय स्वाहा |
ॐ इन्द्रजीतप्रहारामोघ-ब्रह्मास्त्रनिवारकाय स्वाहा |
ॐ पार्थध्वजाग्रसंवासिने स्वाहा |
ॐ शरपञ््जरभेदकाय स्वाहा |
ॐ दशवाहवे स्वाहा |
ॐ लोकपूज्याय स्वाहा |
ॐ जाम्बवान-प्रीतिवर्द्धनाय स्वाहा |
ॐ सीतासहित-श्रीरामपाद-सेवा-धुरन्धराय स्वाहा |

यज्ञ पूर्णाहुति :- श्री हनुमानजी महाराज की आरती करें । ये सरल विधान से कोई भी उपासक नित्य या समयानुसार यज्ञ कर सकते है । अगर आप हनुमानजी के किसी मंत्र का जाप नित्य करते तो उस मंत्र की 10 माला जाप (1000 मंत्र ) करके उसी मंत्र के दशांश ( 108 ) मंत्र की आहुति दे सकते । किसी भी मंत्र के पीछे नमः स्वाहा शब्द जोड़कर स्वाहाकार किया जाता है ।

अगर घर के पूजा स्थानमे नित्य या प्रतिमास या समयानुसार हनुमानजी का ये सरल यज्ञ किया जाय तो वो स्थान दिव्य बन जाता है । स्वयम हनुमानजी की वहाँ जाग्रति हो जाती है । हरेक समस्याओं का निराकरण हो जाता है । धन , धान्य ,ऐश्वर्य प्राप्त होता है ।

Looks like you have blocked notifications!